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বিজ্ঞাপন

Valentine's Day: क्या आप प्यार चाहते हैं या सेक्स?



Valentine's Day: क्या आप प्यार चाहते हैं या सेक्स?


( Apurba Das )

यह विषय वर्तमान समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है। आधुनिक युग में प्रेम और कामुकता (Sex) के बीच का संघर्ष, लोगों की बदलती मानसिकता और रिश्तों की बदलती परिभाषाओं पर नीचे विस्तार से चर्चा की गई है।




आधुनिक युग में प्रेम, यौन संबंध और रिश्तों का विकास: एक विश्लेषण -

मानव सभ्यता की शुरुआत से ही 'प्रेम' शब्द ने एक पवित्र, स्वर्गीय और भावनात्मक अहसास को परिभाषित किया है। लेकिन इक्कीसवीं सदी में हम देख रहे हैं कि इस शाश्वत अवधारणा में तेजी से बदलाव आया है। आज के समाज में प्रेम से ज्यादा क्षणिक संबंधों या यौन सुख को प्राथमिकता मिलती हुई प्रतीत होती है। जैसा कि आपने कहा, प्रेम और यौन संबंध पूरी तरह से अलग हैं, फिर भी आज की पीढ़ी ने इन दोनों को मिला दिया है या कभी-कभी केवल शारीरिक सुख को ही प्राथमिकता दी है।

◽आज के समय में लोग प्रेम करने से क्यों डरते हैं?

प्रेम करने से डरने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं:

(1) धोखा मिलने का डर (Fear of Betrayal): आज के समाज में रिश्ते बहुत नाजुक हो गए हैं। चारों तरफ धोखे और तलाक की बढ़ती दरों को देखकर नई पीढ़ी किसी पर पूरी तरह भरोसा करने से डरती है। "अगर मुझे चोट लगी तो?"—यह सवाल लोगों को भावनात्मक रूप से किसी के करीब जाने से रोकता है।




(2) स्वतंत्रता खोने का डर: आधुनिक जीवनशैली में 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' (Personal Space) एक बड़ा मुद्दा है। बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रेम में पड़ने या कमिटमेंट (Commitment) में जाने से उनकी आजादी छिन जाएगी। साथी के प्रति जिम्मेदारी को कई लोग बोझ मानते हैं।

(3) करियर और प्रतिस्पर्धा: वर्तमान युग कड़ी प्रतिस्पर्धा का युग है। लोग अपना करियर बनाने में इतने व्यस्त हैं कि प्रेम जैसे भावनात्मक रिश्ते को निभाने के लिए उनके पास समय और मानसिक ऊर्जा की कमी है। प्रेम के लिए जिस त्याग और समय की आवश्यकता होती है, उसे देने में कई लोग असमर्थ या अनिच्छुक हैं।

(4) विकल्पों की अधिकता (Paradox of Choice): डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के दौर में लोगों के सामने असंख्य विकल्प मौजूद हैं। यह लोगों को स्थिर नहीं होने देता। "क्या मुझे इससे बेहतर कोई और मिल सकता है?"—यह सोच इंसान को किसी एक गहरे प्रेम संबंध में बंधने से रोकती है।


◽प्रेम की तुलना में यौन संबंधों को अधिक पसंद क्यों किया जाता है?

आजकल के कई युवा भावनात्मक बंधन से ज्यादा 'No Strings Attached' या 'Friends with Benefits' जैसे रिश्ते पसंद करते हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

(1) बिना जिम्मेदारी का सुख: प्रेम में भावनात्मक जिम्मेदारी होती है, लेकिन केवल यौन संबंधों में वह जिम्मेदारी नहीं होती। आज की व्यस्त और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग जटिलताओं से मुक्त होकर आसान और क्षणिक सुख चाहते हैं। कामुकता (Sex) बिना किसी भावनात्मक उलझन के शरीर की प्यास बुझाती है।




(2) तात्कालिक संतुष्टि (Instant Gratification): हम ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ सब कुछ तुरंत उपलब्ध होता है। भोजन से लेकर मनोरंजन तक सब कुछ 'ऑन डिमांड' है। रिश्तों के मामले में भी लोग यही मानसिकता रखते हैं। प्रेम को पनपने में समय लगता है, धैर्य लगता है। लेकिन यौन संबंध तुरंत डोपामाइन (Dopamine) रिलीज करके मन को अस्थायी खुशी देते हैं।

(3) पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव: हमारे समाज में पश्चिमी 'हुक-अप कल्चर' (Hook-up Culture) का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। फिल्मों, वेब सीरीज और इंटरनेट के माध्यम से कामुकता को एक बहुत ही सुलभ और मनोरंजक वस्तु के रूप में दिखाया गया है, जहाँ प्रेम की गहराई का स्थान नगण्य है।
 
(4) भावनात्मक चोट से बचाव: जो लोग अतीत में प्रेम में चोट खा चुके हैं, वे दोबारा वह दर्द नहीं सहना चाहते। इसलिए, वे भावनाओं को अलग रखकर केवल शारीरिक जरूरतों को पूरा करना ही सुरक्षित मानते हैं।





◽प्रेम और कामुकता: एक आध्यात्मिक और लौकिक अंतर:

 प्रेम और यौन संबंध पूरी तरह अलग हैं। यह बात ध्रुव सत्य है।
 
(1) प्रेम आत्मा का मिलन है: सच्चे प्रेम का आधार त्याग, सम्मान, समझ और विश्वास है। यह शरीर से परे है। जब आप किसी से सच्चा प्यार करते हैं, तो उसका शरीर नहीं, बल्कि उसका मन आपके लिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उम्र के साथ शारीरिक सुंदरता और यौन क्षमता कम हो जाती है, लेकिन सच्चा प्रेम समय के साथ और गहरा होता जाता है। वृद्धावस्था में जब कामुकता का कोई अस्तित्व नहीं रहता, तब भी जो चीज़ दो लोगों को साथ जोड़े रखती है, वह प्रेम ही है।

(2) यौन संबंध एक जैविक आवश्यकता है: दूसरी ओर, यौन संबंध प्रकृति द्वारा बनाई गई एक जैविक प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य वंश वृद्धि और शारीरिक सुख है। यह सुख अत्यंत क्षणिक है। संभोग के कुछ समय बाद ही वह उत्तेजना या सुख समाप्त हो जाता है। यदि कोई रिश्ता केवल कामुकता पर आधारित है, तो उसका लंबे समय तक टिकना लगभग असंभव है, क्योंकि शरीर का आकर्षण कम होते ही वह रिश्ता भी खत्म हो जाता है।

(3) प्रेम में कामुकता का स्थान: सच्चे प्रेम में कामुकता हो सकती है, लेकिन यह प्रेम की एकमात्र या मुख्य शर्त नहीं है। प्रेम में यौन संबंध दो लोगों के भावनात्मक मिलन की एक शारीरिक अभिव्यक्ति मात्र है। लेकिन वर्तमान समय में कामुकता को ही प्रेम का प्रमाण मानने की भूल की जा रही है। वास्तव में, पवित्र प्रेम में स्पर्श से ज्यादा अहसास का महत्व होता है। दूर रहकर भी, एक-दूसरे का इंतजार करना, एक-दूसरे की भलाई चाहना—यही सच्चे प्रेम की निशानी है।


अंत में कहा जा सकता है कि समाज चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो जाए, मनुष्य के मन की गहराइयों में वास्तव में एक स्थाई और सुरक्षित आश्रय की आवश्यकता हमेशा रहती है। केवल यौन संबंध मनुष्य को कभी भी पूर्ण मानसिक शांति नहीं दे सकते। यह शायद शरीर को शांत कर सकता है, लेकिन आत्मा को अतृप्त रखता है।

आज की पीढ़ी प्रेम करने से डरती है या कामुकता को प्राथमिकता देती है—यह एक सामाजिक संक्रमण की तरह है। लेकिन दिन के अंत में, जब इंसान अकेला होता है, तो उसे केवल शरीर की नहीं, बल्कि एक समझने वाले मन की जरूरत होती है। शारीरिक सुख की उम्र कम होती है, लेकिन मन के मिलन का सुख अनंत होता है। इसलिए, लोगों को यह समझना चाहिए कि कामुकता जीवन का एक हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह कभी भी प्रेम का विकल्प नहीं हो सकती। प्रेम की पवित्रता और इसकी भावनात्मक गहराई ही मनुष्य को सही अर्थों में पूर्ण बनाती है।