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বিজ্ঞাপন

आज विश्व रेडियो दिवस है: वह जादुई आवाज़ जो अब घरों से ओझल हो गई



आज विश्व रेडियो दिवस है: वह जादुई आवाज़ जो अब घरों से ओझल हो गई

( अपूर्व दास )

आज 13 फरवरी है, यानी 'विश्व रेडियो दिवस'। यह दिन उस माध्यम को याद करने का दिन है, जिसने दशकों तक दुनिया को एक सूत्र में पिरोकर रखा। एक समय था जब रेडियो सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं, बल्कि परिवार का एक सदस्य माना जाता था। सुबह की शुरुआत 'वंदे मातरम्' और आकाशवाणी की सिग्नेचर ट्यून के साथ होती थी। लेकिन आज, डिजिटल क्रांति के शोर में, वह लकड़ी का बक्सा और उसकी सुरीली आवाज़ हमारे ड्राइंग रूम से लगभग गायब हो चुकी है।

रेडियो का इतिहास, उसका आविष्कार, भारत में उसका आगमन और एफएम (FM) रेडियो की रंगीन दुनिया—आइए इस सुनहरे सफर पर एक नज़र डालें।

⚪ रेडियो का आविष्कार: विज्ञान का एक अद्भुत चमत्कार
रेडियो का आविष्कार किसी एक व्यक्ति की मेहनत का नतीजा नहीं था, बल्कि यह कई वैज्ञानिकों के वर्षों के शोध का परिणाम था। हालांकि, बेतार संचार (wireless communication) को दुनिया के सामने लाने का मुख्य श्रेय गुग्लिल्मो मार्कोनी (Guglielmo Marconi) को दिया जाता है।



⚪ सिद्धांत और शुरुआती प्रयोग:

जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने सबसे पहले यह सिद्धांत दिया था कि विद्युत चुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) हवा में यात्रा कर सकती हैं। इसके बाद हनरिक हर्ट्ज़ ने इन तरंगों को सिद्ध किया।

⚪ मार्कोनी का योगदान:

इटली के वैज्ञानिक गुग्लिल्मो मार्कोनी ने 1890 के दशक में इन सिद्धांतों का उपयोग करके एक ऐसा उपकरण बनाया जो बिना तारों के सिग्नल भेज सकता था।

◽ 1895 में, उन्होंने अपने घर के बगीचे में पहला सफल सिग्नल भेजा।

◽ 1901 में, मार्कोनी ने अटलांटिक महासागर के पार (इंग्लैंड से कनाडा) पहला रेडियो संदेश भेजकर इतिहास रच दिया।

⚪ जे.सी. बोस का योगदान:
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस ने भी उसी समय मिलिमीटर तरंगों का प्रदर्शन किया था और उन्होंने ही सबसे पहले "मरक्यूरी कोहेरर" का आविष्कार किया था, जिसका उपयोग बाद में मार्कोनी ने अपने रेडियो में किया।

⚪ रेडियो पर पहली प्रसारण सेवा (Global Broadcast)
शुरुआत में रेडियो का उपयोग केवल 'रेडियो टेलीग्राफी' यानी समुद्री जहाजों और सेना द्वारा संदेश भेजने (डॉट्स और डैश के रूप में) के लिए किया जाता था। आवाज और संगीत का प्रसारण बाद में शुरू हुआ।



⚪ आवाज़ का जादू:

24 दिसंबर, 1906 की शाम को, रेजिनाल्ड फेसेन्डेन (Reginald Fessenden) ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स से पहला ऑडियो प्रसारण किया। समुद्र में तैर रहे जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने हेडफोन पर मोर्स कोड की जगह एक इंसानी आवाज़ सुनी, जो वायलिन बजा रही थी और बाइबिल के अंश पढ़ रही थी। यह दुनिया का पहला एएम (AM) रेडियो प्रसारण माना जाता है।

⚪ पहला वाणिज्यिक रेडियो स्टेशन:

दुनिया का पहला नियमित और वाणिज्यिक रेडियो स्टेशन 'KDKA' था, जो 2 नवंबर, 1920 को अमेरिका के पिट्सबर्ग में शुरू हुआ। इसने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का प्रसारण किया था, जो उस समय एक बड़ी क्रांति थी।

⚪ भारत में रेडियो का आगमन और विकास

भारत में रेडियो का इतिहास बेहद रोमांचक है। गुलामी के दौर से लेकर आजाद भारत की आवाज बनने तक, रेडियो ने हर पल देश का साथ निभाया है।

⚪ शुरुआती प्रयास (1920 का दशक):

भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत निजी तौर पर शौकिया क्लबों द्वारा की गई थी।
◽ जून 1923 में, 'रेडियो क्लब ऑफ बॉम्बे' ने देश का पहला प्रसारण किया।
◽ इसके बाद, 'कलकत्ता रेडियो क्लब' ने अपना प्रसारण शुरू किया।

⚪ इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC):

23 जुलाई, 1927 को लॉर्ड इरविन ने बॉम्बे में 'इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी' का उद्घाटन किया। यह भारत में संगठित रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी। कुछ ही हफ्तों बाद, 26 अगस्त 1927 को कलकत्ता केंद्र की शुरुआत हुई।

⚪ आकाशवाणी का जन्म:

जब निजी कंपनी (IBC) वित्तीय संकट में आ गई, तो सरकार ने इसे अपने हाथ में ले लिया।
◽ 1 अप्रैल, 1930 को इसका नाम बदलकर 'इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस' (ISBS) रखा गया।
◽ 8 जून, 1936 को इसका नाम बदलकर 'ऑल इंडिया रेडियो' (AIR) कर दिया गया।
◽ 1957 में, आधिकारिक तौर पर इसे 'आकाशवाणी' नाम दिया गया। यह नाम मैसूर के एम.वी. गोपालस्वामी के सुझाव पर लिया गया था, जिसका अर्थ है "आकाश से आने वाली वाणी"।


⚪ भारत के पहले रेडियो केंद्र और उनका विस्तार

भारत में रेडियो स्टेशनों का विस्तार धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से हुआ।

⚪ पहला केंद्र: जैसा कि उल्लेख किया गया है, भारत का पहला रेडियो स्टेशन बॉम्बे (अब मुंबई) में स्थापित किया गया था। इसके तुरंत बाद कलकत्ता (कोलकाता) और फिर मद्रास (चेन्नई) में केंद्र खोले गए।

⚪ स्वतंत्रता के समय स्थिति:
जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो देश में केवल 6 रेडियो स्टेशन थे:
◽ दिल्ली
◽ बॉम्बे
◽ कलकत्ता
◽ मद्रास
◽ लखनऊ
◽ तिरुचिरापल्ली
आज आकाशवाणी दुनिया के सबसे बड़े रेडियो नेटवर्क में से एक है, जो देश की 99% आबादी तक अपनी पहुंच रखता है।

⚪ रेडियो के सुनहरे दौर के लोकप्रिय कार्यक्रम

एक ऐसा दौर था जब लोग रेडियो के पास कान लगाकर बैठते थे। चाहे युद्ध की खबरें हों, क्रिकेट का मैच हो, या फिल्मों के गाने, रेडियो ही मनोरंजन का एकमात्र साधन था।

⚪ बिनाका गीतमाला (Binaca Geetmala):

यह भारतीय रेडियो इतिहास का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम माना जाता है। अमीन सयानी की जादुई आवाज़—"बहनों और भाइयों"—को सुनने के लिए लोग बुधवार की शाम को सारे काम छोड़ देते थे। यह कार्यक्रम 1952 में रेडियो सीलोन पर शुरू हुआ और बाद में विविध भारती पर आया।

⚪ विविध भारती (Vividh Bharati):

1957 में शुरू हुई 'विविध भारती' सेवा ने हिंदी फिल्म संगीत को घर-घर पहुंचाया। इसके कुछ सदाबहार कार्यक्रम आज भी याद किए जाते हैं:
◽ हवामहल: यह नाटकों (रेडियो प्ले) का कार्यक्रम था। रात को परिवार के लोग साथ बैठकर ये नाटक सुनते थे और अपनी कल्पना में दृश्य बनाते थे।
◽ सैनिक भाइयों के लिए: यह कार्यक्रम सेना के जवानों के फरमाइशी गानों के लिए समर्पित था, जो देश की भावनाओं को जोड़ता था।
◽ जयमाला: इसमें फौजी भाइयों की पसंद के गीत और कभी-कभी फिल्मी सितारे एंकरिंग करते थे।
◽ बेला के फूल और छायागीत: पुराने और सुरीले गीतों के लिए प्रसिद्ध कार्यक्रम।

⚪ समाचार और क्रिकेट कमेंट्री:

देवकीनंदन पांडे की गंभीर आवाज़ में समाचार और सुशील दोषी या जसदेव सिंह की आवाज़ में क्रिकेट कमेंट्री सुनने का रोमांच ही कुछ और था। लोग रेडियो को कान से सटाकर स्कोर सुनते थे और पूरे मोहल्ले को बताते थे।

⚪ भारत में एफएम (FM) रेडियो क्रांति

1990 के दशक तक रेडियो को 'बूढ़ों का साथी' माना जाने लगा था, क्योंकि टीवी आ चुका था। लेकिन एफएम (Frequency Modulation) तकनीक ने रेडियो को फिर से युवा और कूल बना दिया।

⚪ एफएम की शुरुआत:

भारत में एफएम प्रसारण की शुरुआत 1977 में चेन्नई में मद्रास आकाशवाणी से हुई थी। लेकिन असली क्रांति तब आई जब सरकार ने रेडियो क्षेत्र में निजीकरण (Privatization) की अनुमति दी।

⚪ निजी एफएम का दौर:

2001 में भारत सरकार ने निजी कंपनियों को एफएम चैनल शुरू करने की इजाजत दी।

◽ पहला निजी एफएम: 2001 में बैंगलुरु में 'रेडियो सिटी' (Radio City) भारत का पहला निजी एफएम चैनल बना।
◽ इसके बाद रेडियो मिर्ची, रेड एफएम (Red FM) और बिग एफएम (Big FM) जैसे बड़े खिलाड़ी मैदान में आए।

⚪ एफएम की खासियतें:

एफएम रेडियो ने प्रसारण की गुणवत्ता (Sound Quality) को पूरी तरह बदल दिया। एएम (AM) रेडियो में जहां खरखराहट होती थी, वहीं एफएम की आवाज़ स्टीरियो और बिल्कुल साफ थी। इसने 'रेडियो जॉकी' (RJ) की नई संस्कृति को जन्म दिया।

⚪ प्रमुख एफएम चैनल और आधुनिक लोकप्रिय कार्यक्रम
आज भारत के हर बड़े शहर में दर्जनों एफएम चैनल हैं। इनका मुख्य फोकस मनोरंजन, बॉलीवुड संगीत और शहर की हलचल है।

⚪ प्रमुख रेडियो चैनल्स:
◽ Radio Mirchi (98.3 FM): इनका स्लोगन "इट्स हॉट" काफी मशहूर है।
◽ Red FM (93.5 FM): "बजाते रहो" टैगलाइन के साथ यह युवाओं में बहुत लोकप्रिय है।
◽ Radio City (91.1 FM): यह पुराने और नए गानों का अच्छा मिश्रण पेश करता है।
◽ Big FM (92.7 FM): यह रेट्रो गानों (पुराने गानों) के लिए जाना जाता है।
◽ Fever FM (104 FM): यह बड़े शहरों में नाटकों और ब्लॉकबस्टर गानों के लिए प्रसिद्ध है।

⚪ एफएम के लोकप्रिय कार्यक्रम (शोज़) और आरजे (RJs):
एफएम रेडियो की जान उसके आरजे (RJs) होते हैं। उनकी बातें, उनका अंदाज और हास्य श्रोताओं को बांधे रखता है।

◽ लव गुरु (Love Guru):
रेडियो सिटी पर आने वाला यह शो भारत के सबसे पुराने और लोकप्रिय शोज़ में से एक है। इसमें प्यार, दिल टूटने और रिश्तों की समस्याओं पर सलाह दी जाती है। लव गुरु की भारी और रहस्यमयी आवाज़ आज भी लोगों को पसंद है।

◽ यादों का इडियट बॉक्स (नीलेश मिसरा के साथ):
बिग एफएम पर नीलेश मिसरा की कहानियां सुनाने का अंदाज बेहद अनूठा है। उन्होंने साबित किया कि रेडियो पर सिर्फ गाने नहीं, बल्कि लंबी कहानियां भी सुनी जा सकती हैं। "एक काल्पनिक शहर याद शहर..." की कहानियां श्रोताओं को भावुक कर देती हैं।

◽ मॉर्निंग नंबर 1 (RJ Malishka - Red FM):
मुंबई में आरजे मलिष्का का शो बेहद लोकप्रिय है। वे न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि शहर की समस्याओं (जैसे गड्ढे, ट्रैफिक) को भी उठाती हैं और प्रशासन से सवाल करती हैं।

◽ सुहाना सफर (अन्नू कपूर के साथ):
बिग एफएम पर अन्नू कपूर का यह शो पुराने गीतों और उनके पीछे की कहानियों का खजाना है। उनकी किस्सागोई शैली श्रोताओं को पुराने जमाने में ले जाती है।

◽ मिर्ची मुर्गा (RJ Naved):
आरजे नावेद का प्रैंक कॉल (Prank Call) शो 'मिर्ची मुर्गा' इंटरनेट और रेडियो दोनों पर वायरल रहता है। इसमें वे लोगों को फोन करके मजाकिया अंदाज में परेशान करते हैं।

⚪ आज का रेडियो और बदलता स्वरूप

आज के "स्पॉटिफाई" और "यूट्यूब" के जमाने में, भौतिक रेडियो सेट (वह ट्रांजिस्टर वाला डिब्बा) हमारे घरों से गायब हो गया है। अब लोग शेल्फ पर रेडियो नहीं रखते। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि रेडियो मर गया है।

सच्चाई यह है कि रेडियो मरा नहीं है, बल्कि उसने अपना रूप बदल लिया है।

⚪ नया अवतार: आज रेडियो हमारे मोबाइल फोन में 'एप्स' के रूप में, कारों के म्यूजिक सिस्टम में और 'पॉडकास्ट' के रूप में जिंदा है। इंटरनेट रेडियो ने इसे दुनिया के किसी भी कोने में सुनना संभव बना दिया है।

⚪ आपदा में साथी: जब बाढ़, तूफान या भूकंप जैसी आपदाएं आती हैं और मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट फेल हो जाता है, तब आज भी वह पुराना एनालॉग रेडियो ही काम आता है।

विश्व रेडियो दिवस पर हमें इस माध्यम की ताकत को पहचानना चाहिए। यह वह माध्यम है जो बिना किसी स्क्रीन को देखे, सीधे हमारे कानों के जरिए दिल तक पहुंचता है। जैसा कि रेडियो पर अक्सर कहा जाता है— "ये आकाशवाणी है, अब आप समाचार सुनिए..."— यह वाक्य आज भी कई लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक है।