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ठंडे मौसम में तिल पीठा और तिल क्यों खाना चाहिए? (तिल पीठा – असम का पारंपरिक खाद्य और तिल सेवन के स्वास्थ्य लाभ)



ठंडे मौसम में तिल पीठा और तिल क्यों खाना चाहिए? (तिल पीठा – असम का पारंपरिक खाद्य और तिल सेवन के स्वास्थ्य लाभ)

( Writer & Editor : अनुराधा दास ) 


ठंडे मौसम में ठंड धीरे-धीरे बढ़ने लगती है और शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा, गर्माहट तथा पोषण की आवश्यकता होती है। भारत के कई हिस्सों में इस मौसम में तिल (Sesame Seeds) और तिल से बने खाद्य खाने की परंपरा है। असम में विशेष रूप से तिल पीठा एक प्रसिद्ध पारंपरिक खाद्य है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार तिल को ऊष्ण (गर्म प्रभाव वाला) माना गया है, इसलिए ठंडे मौसम में इसका सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।



◽तिल पीठा (असमिया पारंपरिक खाद्य) क्या है?

तिल पीठा असम की संस्कृति और त्योहारों से जुड़ा हुआ पारंपरिक खाद्य है, जो विशेष रूप से माघ बिहू और ठंडे मौसम में बनाया जाता है। इसे चावल के आटे की परत में भुने हुए तिल और गुड़ (या शक्कर) की भरावन डालकर बनाया जाता है।
यह न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि ऊर्जा से भरपूर भी होता है, इसलिए ठंड के मौसम में यह शरीर को गर्म रखने में मदद करता है।





◽ठंडे मौसम में तिल और तिल पीठा खाने के मुख्य कारण

1. शरीर को गर्म रखने में सहायक

तिल का स्वभाव गर्म होता है। शिरदी जैसे ठंडे और शुष्क मौसम में तिल का सेवन शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और ठंड से होने वाली समस्याओं से बचाता है।

2. ऊर्जा और ताकत प्रदान करता है

तिल में प्रोटीन, हेल्दी फैट और कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होते हैं। तिल पीठा खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और कमजोरी महसूस नहीं होती।

3. हड्डियों और जोड़ों के लिए फायदेमंद

तिल कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। सर्दियों में जोड़ों के दर्द की समस्या बढ़ जाती है, ऐसे में तिल का सेवन बहुत लाभकारी होता है।

4. पाचन तंत्र को मजबूत करता है

तिल में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है। ठंड के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, ऐसे में तिल पीठा पेट के लिए फायदेमंद होता है।

5. त्वचा और बालों के लिए लाभकारी

तिल में विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को रूखेपन से बचाते हैं और बालों को मजबूत बनाते हैं। शिरदी के मौसम में त्वचा का सूखना आम बात है, तिल इसका अच्छा समाधान है।

6. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

तिल में जिंक, आयरन और सेलेनियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं। इससे सर्दी-खांसी और मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।




◽तिल सेवन और तिल पीठा के स्वास्थ्य लाभ

• हृदय स्वास्थ्य के लिए अच्छा

तिल में पाए जाने वाले हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं, जिससे दिल स्वस्थ रहता है।

• खून की कमी दूर करता है

तिल आयरन का अच्छा स्रोत है। जिन लोगों को एनीमिया या कमजोरी की समस्या होती है, उनके लिए तिल का सेवन लाभदायक है।

• मानसिक तनाव कम करता है

तिल में मौजूद मैग्नीशियम और ट्रिप्टोफैन मानसिक शांति प्रदान करते हैं और तनाव कम करने में सहायक होते हैं।

• पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए फायदेमंद

तिल हार्मोन संतुलन में मदद करता है और प्रजनन स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है।

◽किन लोगों को तिल या तिल पीठा नहीं खाना चाहिए?

हालाँकि तिल बहुत फायदेमंद है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसका सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है।

1. अत्यधिक पित्त प्रकृति वाले लोग

आयुर्वेद के अनुसार जिन लोगों में पित्त ( Gas- Gastric ) अधिक होता है, उन्हें तिल का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। इससे एसिडिटी, जलन और पेट में छाले हो सकते हैं।

2. जिनको बार-बार दस्त या पेट में जलन रहती हो

तिल गर्म होता है, इसलिए दस्त, पेचिश या पेट की जलन की समस्या वाले लोगों को इससे बचना चाहिए।

3. एलर्जी वाले व्यक्ति

कुछ लोगों को तिल से एलर्जी होती है। ऐसे लोगों को तिल पीठा या तिल से बने खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए।

4. बहुत अधिक वजन या मोटापे से परेशान लोग

तिल में कैलोरी और फैट अधिक होता है। मोटापे से परेशान लोगों को सीमित मात्रा में ही तिल का सेवन करना चाहिए।

5. ऑपरेशन या गंभीर बीमारी के बाद

हाल ही में सर्जरी हुई हो या शरीर में सूजन की समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह के बिना तिल का सेवन न करें।




◽तिल का सही सेवन कैसे करें?

• तिल को हमेशा भूनकर या पकाकर ही खाएं।
• तिल पीठा का सेवन सीमित मात्रा में करें, ज्यादा नहीं।
• सुबह या दिन में तिल खाना अधिक लाभदायक होता है।
• तिल के साथ गुड़ का संयोजन स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना जाता है।

ठंडे मौसम में तिल पीठा और तिल का सेवन शरीर को गर्म रखने, ताकत बढ़ाने और रोगों से बचाने में बहुत सहायक होता है। यह असम की पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा होने के साथ-साथ एक संपूर्ण पौष्टिक खाद्य भी है। हालांकि, तिल का सेवन हमेशा अपनी शारीरिक प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर करना चाहिए। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर तिल पीठा सर्दियों में सेहत का बेहतरीन साथी बन सकता है।







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