उत्तर–पूर्वी भारत में शीत का प्रकोप क्यों बढ़ गया है: वैज्ञानिक और प्रामाणिक कारण
( Anuradha Das )
पिछले कुछ दिनों में उत्तर–पूर्वी भारत के राज्यों—असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम, त्रिपुरा और सिक्किम—में सर्दियों के दौरान असामान्य रूप से अधिक ठंड देखी जा रही है। कई बार तापमान सामान्य से 4–7 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह स्थिति केवल स्थानीय मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तनों से जुड़ी हुई है।
📍 अगले 4–5 दिनों तक — सबसे तीव्र शीतलहर और कोहरा रहेगा (ईलर्ट जारी)
📍 पूरा सप्ताह — सर्दी में वृद्धि और कोहरे का असर (विशेषकर सुबह/शाम)
📍 जनवरी से फरवरी — कुछ जगह में सर्दी के दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।
भारत में कहाँ-कहाँ शीत का प्रकोप बढ़ गया है ?
1. उत्तर भारत (North India)
• दिल्ली-NCR: लगातार कम तापमान, घना कोहरा और शीतलहर का प्रभाव देखा गया है। IMD ने ठंड के चलते चेतावनियाँ जारी की हैं।
• उत्तर प्रदेश (UP): सर्दी इतनी तीव्र हुई कि कई जिलों में स्कूल बंद रहे।
• बिहार: राज्य के कई जिलों में भी शीतलहर ने पकड़ बनाई और IMD ने चेतावनी जारी की।
2. पूर्वोत्तर और आस-पास के क्षेत्र
• असम (Assam): गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी नीचे गिरने पर स्कूलों को छुट्टी देना पड़ा।
• पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में मौसम विभाग ने कोहरे और ठंडी सुबह के संकेत दिए हैं, जिनसे तापमान गिरता है।
3. केंद्रीय-पश्चिम और अन्य इलाके
• IMD की चेतावनी के अनुसार मध्य भारत (मध्य प्रदेश), राजस्थान, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में भी सर्दी और शीतलहर के प्रभाव के कारण तापमान अनियमित रूप से गिरा।
• कई राज्यों में मौसम विभाग ने कोहरे और शीतलहर चेतावनी जारी की, जिससे लोगों को सुबह-सुबह धुंध और ठंड का सामना करना पड़ा।
⚠️ घना कोहरा
उत्तर भारत में सुबह-सुबह घना कोहरा छा जाता है, जिससे:
• दृश्यता बहुत कम हो जाती है
• यातायात प्रभावित होता है
• उड़ानों और ट्रेन सेवाओं में देरी होती है
ये हालात दिल्ली-NCR, यूपी और आसपास के इलाकों में कई दिनों तक देखे गए।
◽शीतलहर और तापमान गिरना
• कई जगहों पर तापमान “सामान्य से नीचे” दर्ज किया गया, जिससे शीतलहर की स्थिति बनी।
• IMD ने कुछ मध्य और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में अतिरिक्त दिनों के लिए ठंड वृद्धि का अनुमान लगाया है।
1. जलवायु परिवर्तन (IPCC की रिपोर्ट के अनुसार)
IPCC की छठी आकलन रिपोर्ट (AR6) स्पष्ट करती है कि ग्लोबल वार्मिंग केवल गर्मी नहीं बढ़ाती, बल्कि मौसम को अधिक चरम (Extreme) बनाती है।
इसी कारण:
• कहीं अत्यधिक गर्मी
• तो कहीं असामान्य ठंड
देखी जा रही है। आर्कटिक क्षेत्र के तेजी से गर्म होने से जेट स्ट्रीम कमजोर और अस्थिर हो रही है, जिससे ठंडी हवाएँ दक्षिण और पूर्व की ओर अधिक अंदर तक पहुँच रही हैं। इसका सीधा असर उत्तर–पूर्वी भारत पर पड़ रहा है।
2. पश्चिमी विक्षोभ का बदला हुआ प्रभाव (IMD)
IMD के अनुसार, सर्दियों में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक शक्तिशाली हो रहे हैं।
ये विक्षोभ:
• हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी और ठंडी हवाएँ
लाते हैं। जब ये हवाएँ पूर्व की ओर बढ़ती हैं, तो उत्तर–पूर्वी भारत में शीत लहर (Cold Wave) की स्थिति बन जाती है।
3. हिमालय और भौगोलिक स्थिति
उत्तर–पूर्वी भारत हिमालय और पटकोई पहाड़ियों से घिरा हुआ है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार:
• पहाड़ी क्षेत्रों से ठंडी हवा नीचे की ओर बहती है
• इसे Cold Air Drainage कहा जाता है
अरुणाचल और सिक्किम में तापमान गिरने पर इसका असर असम और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में भी दिखता है।
4. वनों की कटाई और स्थानीय जलवायु
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से जुड़े अध्ययनों में बताया गया है कि उत्तर–पूर्वी भारत में वनों की कटाई से:
• नमी संतुलन बिगड़ा और तापमान नियंत्रित करने की प्राकृतिक क्षमता घटी
• जंगल दिन में गर्मी और रात में ठंड को संतुलित रखते हैं। जब जंगल कम होते हैं, तो सर्दियों में ठंड अधिक तीव्र हो जाती है।
5. कोहरा और सूर्य किरणों की कमी
IMD के अनुसार, सर्दियों में:
नमी, ठंडी हवाएँ और हल्का प्रदूषण मिलकर घना कोहरा बनाते हैं। कोहरा सूर्य की किरणों को धरती तक पहुँचने से रोकता है, जिससे दिन में भी तापमान नहीं बढ़ पाता।
6. वर्षा के पैटर्न में बदलाव
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, उत्तर–पूर्वी भारत में अब सर्दियों के दौरान असामान्य वर्षा देखी जा रही है। ठंडी बारिश के बाद तापमान तेजी से गिरता है, जिससे ठंड का असर कई दिनों तक बना रहता है।
7. IMD द्वारा दर्ज आँकड़े
IMD के हालिया रिकॉर्ड बताते हैं कि:
• न्यूनतम तापमान के नए रिकॉर्ड बने हैं
• ठंड की अवधि पहले से लंबी हो रही है
यह स्पष्ट करता है कि यह केवल “मौसमी संयोग” नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन का संकेत है।
उत्तर–पूर्वी भारत में बढ़ता शीत प्रकोप वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कारणों—जलवायु परिवर्तन, पश्चिमी विक्षोभ, भौगोलिक संरचना और पर्यावरण असंतुलन—का परिणाम है।
IMD और IPCC जैसे विश्वसनीय संस्थानों के अनुसार, यदि पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल नीतियों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में ठंड और अधिक तीव्र तथा अनियमित हो सकती है।