रोंगकेर करक्ली (Rongker Karkli) – कार्बी समाज का पारंपरिक एवं धार्मिक उत्सव
( Anuradha Das : Editor )
रोंगकेर करक्ली (Rongker Karkli) असम राज्य के कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में निवास करने वाले कार्बी जनजाति का एक प्रमुख पारंपरिक, धार्मिक और सामुदायिक उत्सव है। यह पर्व कार्बी समाज की प्राचीन आस्था, प्रकृति-पूजा, कृषि-परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। रोंगकेर करक्ली को संक्षेप में रोंगकेर भी कहा जाता है। यह उत्सव मुख्य रूप से गाँव की सुरक्षा, सुख-समृद्धि, अच्छी फसल, स्वास्थ्य और बुरी शक्तियों से रक्षा के उद्देश्य से मनाया जाता है।
◽उत्सव के नाम का अर्थ
“रोंगकेर” शब्द कार्बी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है गाँव की सीमा की रक्षा से संबंधित अनुष्ठान। वहीं “करक्ली” का अर्थ सामूहिक या समूह पूजा से है। इस प्रकार, रोंगकेर करक्ली का शाब्दिक अर्थ हुआ—
गाँव और समुदाय की रक्षा तथा कल्याण के लिए की जाने वाली सामूहिक धार्मिक पूजा।
◽ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
रोंगकेर करक्ली की परंपरा बहुत प्राचीन है। इसका इतिहास लिखित रूप में सीमित रूप से उपलब्ध है, लेकिन नृवंशविज्ञान (Anthropology) से संबंधित अध्ययनों, शोध-पत्रों और लोक परंपराओं के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि यह उत्सव सदियों से कार्बी समाज का अभिन्न हिस्सा रहा है।
कार्बी समाज पर किए गए अध्ययनों में उल्लेख मिलता है कि रोंगकेर उत्सव का उद्देश्य देवताओं और आत्माओं को प्रसन्न कर प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और दुर्भाग्य से गाँव की रक्षा करना है।
◽उत्सव का समय और अवधि
रोंगकेर करक्ली सामान्यतः जनवरी से फरवरी के बीच मनाया जाता है। कई स्थानों पर इसे 5 जनवरी या 5 फरवरी को आयोजित किया जाता है। यह समय कृषि कार्यों के आरंभ से पहले का होता है, इसलिए यह पर्व नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। उत्सव की अवधि आमतौर पर तीन दिनों की होती है, जिसमें विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान क्रमबद्ध रूप से संपन्न किए जाते हैं।
◽धार्मिक मान्यताएँ और देवता
कार्बी समाज की धार्मिक व्यवस्था मुख्य रूप से प्रकृति-आधारित है। रोंगकेर करक्ली में अनेक स्थानीय देवताओं और आत्माओं की पूजा की जाती है। प्रमुख देवताओं में शामिल हैं:
• हेम्फू (Hemphu) – सर्वोच्च देवता
• मुक्रांग (Mukrang) – शक्ति और सुरक्षा के देवता
• रेंगबोंग (Rengbong) – प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण से जुड़े देवता
• और भी देवताए हैं,
इन देवताओं से गाँव की सुरक्षा, अच्छी वर्षा, उन्नत फसल और सामाजिक शांति की कामना की जाती है।
◽अनुष्ठान और पूजा विधि
रोंगकेर करक्ली का आयोजन गाँव के एक पवित्र स्थान या खुले मैदान में किया जाता है। इस पूजा का संचालन पारंपरिक पुजारी, जिन्हें कार्बी समाज में विशेष धार्मिक पद प्राप्त होता है, करते हैं।
पूरे उत्सव को कई चरणों में विभाजित किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
• सदी (Sadi)
• करक्ली (Karkli)
• रोंगफु-रोंगलिंग-कांगथिन
• लांघे रोंगकेर
पूजा के दौरान पारंपरिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रतीकात्मक बलि दी जाती है, जिसमें आमतौर पर मुर्गा या सूअर शामिल होता है। इसका उद्देश्य बुरी आत्माओं को दूर भगाना और गाँव को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त करना होता है।
◽सामाजिक नियम और प्रतिबंध
रोंगकेर करक्ली के दौरान कुछ विशेष सामाजिक नियमों का पालन किया जाता है:
• पूजा के समय बाहरी लोगों का गाँव में प्रवेश सीमित किया जा सकता है।
• कई स्थानों पर पूजा स्थल में केवल पुरुषों की भागीदारी की अनुमति होती है।
• उत्सव के दिनों में गाँव के लोग शिकार, कृषि या अन्य दैनिक कार्यों से विराम लेते हैं।
• ये नियम समुदाय की एकाग्रता और धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं।
◽सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
रोंगकेर करक्ली केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सामूहिक सहयोग का प्रतीक भी है। इस अवसर पर गाँव का प्रत्येक परिवार किसी न किसी रूप में योगदान देता है।
पूजा के बाद पारंपरिक कार्बी लोक नृत्य, संगीत और सामूहिक भोज का आयोजन होता है। ढोल, बांसुरी और स्थानीय वाद्ययंत्रों की धुन पर किए जाने वाले नृत्य कार्बी संस्कृति की जीवंतता को दर्शाते हैं।
◽आधुनिक समय में रोंगकेर करक्ली
आधुनिकता और शहरीकरण के प्रभाव के बावजूद, रोंगकेर करक्ली आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। असम सरकार द्वारा हाल के वर्षों में रोंगकेर करक्ली के अवसर पर प्रतिबंधित अवकाश घोषित किया गया है, जिससे इस पर्व को आधिकारिक मान्यता मिली है।
आज यह उत्सव कार्बी पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजातीय विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
रोंगकेर करक्ली कार्बी समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो धार्मिक आस्था, प्रकृति-पूजा, कृषि जीवन और सामाजिक एकता को एक साथ जोड़ता है। यह उत्सव न केवल गाँव की सुरक्षा और समृद्धि की कामना करता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस प्रकार, रोंगकेर करक्ली असम की जनजातीय संस्कृति का एक अमूल्य हिस्सा है, जिसे संरक्षित करना और समझना अत्यंत आवश्यक है।