लीवर के लिए वरदान : होम्योपैथिक औषधियाँ
Chelidonium Majus Q एवं Carduus Marianus Q
( अपूर्व दास )
लीवर (यकृत) हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। यह पाचन, विषैले तत्वों को बाहर निकालने, रक्त को शुद्ध करने तथा वसा के चयापचय में प्रमुख भूमिका निभाता है। आधुनिक जीवनशैली, गलत खान-पान, शराब सेवन, दवाओं का अधिक उपयोग और तनाव के कारण लीवर से जुड़ी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में लीवर के रोगों के लिए कुछ विशिष्ट औषधियाँ बताई गई हैं, जिनमें Chelidonium Majus और Carduus Marianus का विशेष स्थान है।
1. Chelidonium Majus Q (चेलिडोनियम मैजस)
◽होम्योपैथिक ग्रंथों के अनुसार
होम्योपैथिक मटेरिया मेडिका के अनुसार Chelidonium Majus का मुख्य प्रभाव लीवर और पित्ताशय (Gall Bladder) पर पड़ता है। यह औषधि विशेष रूप से तब उपयोगी मानी जाती है जब लीवर सुस्त हो, पित्त का प्रवाह बाधित हो और दाहिनी ओर दर्द हो।
◽प्रमुख लक्षण जिनमें उपयोग
• लीवर में सूजन या बढ़ाव
• दाहिनी पसली के नीचे दर्द
• पीलिया (Jaundice)
• कड़वा डकार आना
• भूख न लगना
• मल का रंग पीला या सफेद होना
• जीभ पर पीली परत
होम्योपैथिक ग्रंथों में कहा गया है कि यदि दर्द दाहिने कंधे या पीठ तक फैलता हो, तो Chelidonium विशेष लाभकारी हो सकता है।
◽ सेवन की मात्रा (सामान्य मार्गदर्शन)
• वयस्क (18 वर्ष से ऊपर): 10–15 बूंदें आधा कप पानी में, दिन में 2 बार।
• 12–18 वर्ष: 8–10 बूंदें, दिन में 1–2 बार।
• 5–12 वर्ष: 5–7 बूंदें, दिन में 1 बार।
• खाने से 30 मिनट पहले या बाद में लेना उचित माना जाता है।
2. Carduus Marianus Q (कार्डुअस मैरियानस)
◽ होम्योपैथिक ग्रंथों के अनुसार
Carduus Marianus को होम्योपैथी में लीवर का टॉनिक कहा जाता है। यह औषधि विशेष रूप से फैटी लिवर, शराब से होने वाले लीवर रोग, लीवर सिरोसिस और विषैले प्रभावों में उपयोगी मानी जाती है।
◽प्रमुख उपयोग
• फैटी लिवर
• शराब के कारण लीवर खराब होना
• लीवर में भारीपन
• मतली और उल्टी
• पेट के दाहिने हिस्से में दर्द
• कब्ज या दस्त
• लीवर एंजाइम बढ़े हुए होना
ग्रंथों में उल्लेख है कि यह दवा लीवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में सहायक मानी जाती है।
• सेवन की मात्रा (सामान्य मार्गदर्शन)।
• वयस्क: 15–20 बूंदें आधा कप पानी में, दिन में 2 बार।
• 12–18 वर्ष: 10–12 बूंदें, दिन में 1–2 बार।
• 5–12 वर्ष: 5–8 बूंदें, दिन में 1 बार।
• सुबह खाली पेट और शाम को लेना अधिक प्रचलित है।
3. किन लोगों को यह दवाएँ नहीं लेनी चाहिए
होम्योपैथिक दवाएँ सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती हैं, फिर भी कुछ परिस्थितियों में सावधानी आवश्यक है—
• गर्भवती महिलाएँ (बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं)।
• स्तनपान कराने वाली महिलाएँ।
• गंभीर लीवर फेल्योर के मरीज।
• एल्कोहल पर निर्भर व्यक्ति (Q दवाओं में अल्कोहल होता है)।
• 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे : जिनको किसी विशेष होम्योपैथिक दवा से एलर्जी हो , यदि पहले से एलोपैथिक दवाएँ चल रही हों, तो साथ में लेने से पहले चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
4. महत्वपूर्ण सावधानियाँ
• दवा के साथ शराब, तंबाकू और तले-भुने भोजन से परहेज करें।
• अधिक वसा युक्त भोजन से बचें।
• पर्याप्त पानी पिएँ।
• नियमित जाँच (LFT) कराते रहें।
• स्व-चिकित्सा से बचें।
होम्योपैथिक ग्रंथों के अनुसार Chelidonium Majus Q और Carduus Marianus Q लीवर के लिए अत्यंत उपयोगी मानी गई हैं। Chelidonium जहां पित्त और दाहिने लीवर दर्द में सहायक है, वहीं Carduus Marianus फैटी लिवर और विषैले प्रभावों में लाभकारी मानी जाती है। सही मात्रा, सही समय और योग्य चिकित्सकीय मार्गदर्शन के साथ इनका उपयोग लीवर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
⚠️ नोट: यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार की दवा लेने से पहले योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।