गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर - पाचन तंत्र में होने वाला एक घातक कैंसर!
(अपूर्व दास)
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (Gastrointestinal Stromal Tumor - GIST) पाचन तंत्र में होने वाला एक अत्यंत दुर्लभ लेकिन बहुत ही घातक प्रकार का कैंसर है। चूंकि अन्य कैंसर की तुलना में इस बीमारी का प्रकोप या प्रभावितों की संख्या काफी कम है, इसलिए आम जनता के बीच इसके लक्षणों, कारणों और भयावहता के बारे में विशेष जागरूकता या ज्ञान नहीं देखा जाता है। इस मूक (silent) लेकिन घातक बीमारी के बारे में विस्तार से चर्चा नीचे की गई है।
🔴 कैंसर का बढ़ता वैश्विक खतरा
वर्तमान समय में कैंसर पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर और जानलेवा समस्या बनकर उभरा है। इसका खतरा केवल किसी निश्चित उम्र या वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी उम्र के लोगों में इसका प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। कुछ दशक पहले तक कैंसर को केवल बढ़ती उम्र के साथ होने वाला या सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों को प्रभावित करने वाला रोग माना जाता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला है, अब कम उम्र के लड़के-लड़कियां या बच्चे भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आते देखे जा रहे हैं।
केवल भारत में ही हर साल लगभग 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं। विशेष रूप से बच्चों के मामले में कुछ विशिष्ट प्रकार के कैंसर या ट्यूमर की घटनाएं अधिक सामने आई हैं, जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अत्यंत चिंताजनक विषय है।
विश्व स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे मुख्य कारणों में शामिल हैं:
🔴 दोषपूर्ण जीवनशैली: आजकल लोगों की जीवनशैली काफी बदल गई है, जिसका नकारात्मक प्रभाव शरीर पर पड़ रहा है।
🔴 पर्यावरण प्रदूषण: हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण ने मानव शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ा दी है।
🔴 खान-पान में गड़बड़ी: प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और अस्वस्थ खान-पान के कारण शरीर रोगग्रस्त हो रहा है।
🔴 समय पर निदान न होना: जागरूकता की कमी के कारण कई मामलों में प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का पता नहीं चलता, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
भारत जैसे विकासशील देशों में यह स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि यहां एक बड़ी आबादी समय पर स्क्रीनिंग (Screening) या स्वास्थ्य जांच और उचित चिकित्सा सेवा प्राप्त करने से वंचित रह जाती है।
हम अक्सर अखबारों या पत्रिकाओं में फेफड़ों (Lungs), स्तन (Breast), गर्भाशय (Cervical) और अंडाशय (Ovarian) के कैंसर के बारे में पढ़ते रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ ऐसे कैंसर हैं जो बहुत दुर्लभ हैं और जिनके बारे में बहुत कम चर्चा होती है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (GIST) ऐसा ही एक प्रकार का कैंसर है, जिसके खतरों और लक्षणों के प्रति हर व्यक्ति का सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।
◽ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (GIST) क्या है?
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर पाचन तंत्र में विकसित होने वाला एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। यह बीमारी हमारे शरीर की भोजन पचाने की प्रक्रिया या पाचन तंत्र से जुड़ी है।
यह कैंसर आमतौर पर पेट/आमाशय (Stomach) और छोटी आंत (Small Intestine) में उत्पन्न होता है। हालांकि, कुछ अपवाद मामलों में यह भोजन नली (Esophagus), बड़ी आंत (Large Intestine) या मलाशय (Rectum) में भी हो सकता है।
इस बीमारी की कुछ खास विशेषताएं नीचे दी गई हैं:
🔴 दुर्लभ घटना: गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।
🔴 धीमी गति: यह ट्यूमर या कैंसर अक्सर धीरे-धीरे बढ़ता है।
🔴 सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा (Soft Tissue Sarcoma): जी.आई.एस.टी. (GIST) एक प्रकार का 'सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा' है। यह शरीर के कोमल ऊतकों (tissues) में विकसित होता है।
🔴 आकार में भिन्नता: कुछ ट्यूमर एक इंच से भी छोटे हो सकते हैं। ऐसे छोटे ट्यूमर के मामले में आमतौर पर रोगी के शरीर में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।
इस कैंसर का मुख्य कारण 'आनुवंशिक परिवर्तन' या 'जेनेटिक म्यूटेशन' (Genetic Mutation) को माना गया है।
◽ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के लक्षण
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की पहचान करना अत्यंत कठिन है, क्योंकि इस बीमारी में हर बार लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई बार लोग किसी अन्य स्वास्थ्य कारण से जांच (Test) या सर्जरी करवाते समय ही अचानक इस बीमारी के बारे में जान पाते हैं। फिर भी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ पेट से जुड़ी कुछ सामान्य समस्याओं या लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। यदि ये लक्षण लंबे समय तक दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए ताकि समय रहते बीमारी का पता लगाया जा सके।
◽ प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
🔴 पेट में दर्द: बार-बार पेट में दर्द महसूस करना या पेट में असुविधा होना।
🔴 रक्तस्राव: मल के साथ खून आना या काले रंग का मल होना। यह पेट या आंतों में रक्तस्राव का संकेत देता है।
🔴 कब्ज और थकान: बार-बार कब्ज की समस्या होना और अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस करना।
🔴 वजन कम होना: बिना किसी प्रयास या डाइटिंग के अचानक शरीर का वजन असामान्य रूप से कम हो जाना।
🔴 भूख न लगना: भूख न लगना या खाने की इच्छा बिल्कुल कम हो जाना। थोड़ा खाने पर ही पेट भरा हुआ महसूस होना।
🔴 खून की उल्टी: उल्टी के साथ खून आना एक गंभीर लक्षण है, जो पेट में ट्यूमर होने का संकेत दे सकता है।
◽ इस कैंसर के मुख्य कारण
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के होने के पीछे सबसे बड़ा कारण 'आनुवंशिक परिवर्तन' या जेनेटिक म्यूटेशन है। हमारे शरीर की कोशिकाओं की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करने वाले जीन्स (genes) की संरचना में जब गड़बड़ी होती है, तभी यह बीमारी उत्पन्न होती है।
◽ विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों में KIT या PDGFRA नामक जीन में होने वाले परिवर्तन के कारण कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और अंत में यह ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
◽ यह म्यूटेशन या परिवर्तन आमतौर पर जन्मजात नहीं होता है। यानी, बच्चे जन्म के समय इस बीमारी को लेकर नहीं आते, बल्कि जीवन के बाद के समय में ये परिवर्तन विकसित हो सकते हैं।
◽ इसलिए, अधिकांश मामलों में इस बीमारी को वंशानुगत कैंसर (Hereditary Cancer) नहीं माना जाता है।
◽ जोखिम किसके लिए अधिक है?
हालाँकि किसी भी उम्र के लोग इस बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं, फिर भी कुछ विशेष समूहों के लोगों में इसकी आशंका अधिक देखी जाती है:
🔴 उम्र: 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में GIST कैंसर का प्रकोप अधिक देखा जाता है, हालाँकि यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।
🔴 लिंग: पुरुषों और महिलाओं दोनों के मामले में इस बीमारी के होने की आशंका लगभग समान है।
🔴 आनुवंशिक सिंड्रोम: कुछ दुर्लभ आनुवंशिक समस्याएं, जैसे— 'न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1' (Neurofibromatosis type 1) वाले लोगों में यह ट्यूमर या कैंसर होने की संभावना सामान्य से बहुत अधिक होती है।
🔴 पूर्व इतिहास: जिनके शरीर में पहले कोई अन्य ट्यूमर था या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity System) कमजोर है, उनके मामले में इस बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।
◽ रोकथाम और सावधानियां
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर से कैसे बचा जा सकता है?
इस सवाल का जवाब थोड़ा जटिल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी को आमतौर पर पूरी तरह से रोकना या बचाव करना संभव नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह बीमारी किसी बाहरी वातावरण या जीवनशैली के कारक (जैसे धूम्रपान या प्रदूषण) के परिणामस्वरूप सीधे तौर पर नहीं होती, बल्कि यह मुख्य रूप से शरीर के आंतरिक आनुवंशिक म्यूटेशन के कारण होती है। चूंकि आनुवंशिक परिवर्तन को हम नियंत्रित नहीं कर सकते, इसलिए इससे बचने का कोई निश्चित उपाय अब तक खोजा नहीं गया है।
फिर भी, निराश होने का कोई कारण नहीं है। हालांकि इसे सीधे तौर पर रोका नहीं जा सकता, फिर भी एक स्वस्थ जीवनशैली हमारे शरीर को किसी भी बीमारी के खिलाफ लड़ने की शक्ति प्रदान करती है। कैंसर विशेषज्ञ निम्नलिखित सुझावों का पालन करने की सलाह देते हैं:
◽ पौष्टिक आहार ग्रहण करना: प्रचुर मात्रा में फल, सब्जियां और संतुलित आहार लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। तैलीय मांस-मछली, बाहर का तेल में तला हुआ भोजन, बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और मैदे से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए।
◽ शारीरिक व्यायाम: नियमित व्यायाम और कसरत शरीर को सक्रिय रखती है और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
◽ धूम्रपान और शराब का त्याग: हालांकि GIST सीधे तौर पर धूम्रपान से जुड़ा नहीं है, फिर भी धूम्रपान और शराब छोड़ने से शरीर में कैंसर का समग्र जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
◽ नियमित स्वास्थ्य जांच: चूंकि इस बीमारी के लक्षण जल्दी पकड़ में नहीं आते, इसलिए 40 साल की उम्र पार करने के बाद नियमित रूप से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की जांच या पूर्ण स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से यदि आपको पेट की समस्या लंबे समय से है, तो डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है।
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक दुर्लभ बीमारी होने के बावजूद इसकी भयावहता असीमित है। जागरूकता और सही समय पर इलाज ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है। पेट की छोटी-मोटी समस्या समझकर लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के साथ अब इस बीमारी के लिए भी उन्नत किस्म की 'टार्गेटेड थेरेपी' (Targeted Therapy) और सर्जरी उपलब्ध है। इसलिए डरने के बजाय जागरूक होना ही हमारा काम है।