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फैटी लिवर: लक्षण, समस्या, आहार और आयुर्वेदिक उपचार की विस्तृत जानकारी




फैटी लिवर: लक्षण, समस्या, आहार और आयुर्वेदिक उपचार की विस्तृत जानकारी

(अपूर्व दास)

वर्तमान समय में लोगों की गलत जीवनशैली, अस्वास्थ्यकर खान-पान और अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण विभिन्न प्रकार के रोग दिखाई दे रहे हैं। उनमें से 'फैटी लिवर' (Fatty Liver) या लिवर में चर्बी जमा होने की समस्या प्रमुख है। जब हमारे लिवर या यकृत की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन को पचाने में भी इसकी भूमिका अपरिहार्य है। इस महत्वपूर्ण अंग में चर्बी जमा होने पर इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, जिससे शरीर में कई तरह की जटिलताएं पैदा होती हैं।




⚪ फैटी लिवर आमतौर पर दो प्रकार का होता है:
 
(1) एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (Alcoholic Fatty Liver Disease - AFLD): जो लोग अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं।

(2) नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease - NAFLD): जो लोग शराब नहीं पीते हैं, फिर भी उनके लिवर में चर्बी जमा हो जाती है।

👉 नीचे फैटी लिवर के लक्षण, इससे होने वाली समस्याएं, खान-पान, क्या करें और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में विस्तार से पढ़ें।


🔴 फैटी लिवर होने पर दिखाई देने वाली समस्याएं

फैटी लिवर की समस्या शुरुआती अवस्था में कोई विशेष जटिलता पैदा नहीं करती है। लेकिन समय पर इलाज न करने पर यह भयानक रूप ले सकती है। इससे उत्पन्न होने वाली कुछ मुख्य समस्याएं नीचे दी गई हैं:

⚪ लिवर की सूजन (Inflammation): लिवर में चर्बी जमा होने के कारण लिवर सूज सकता है। इससे लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसे 'स्टियाटोहेपेटाइटिस' (Steatohepatitis) कहा जाता है।

⚪ लिवर फाइब्रोसिस (Liver Fibrosis): लंबे समय तक लिवर में सूजन रहने पर वहां एक तरह का घाव या निशान बन जाता है। इसे फाइब्रोसिस कहते हैं। इससे लिवर के सामान्य कामकाज में बाधा आती है।




⚪ लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis): फाइब्रोसिस का चरम चरण सिरोसिस है। इस अवस्था में लिवर सख्त हो जाता है और इसका आकार छोटा हो जाता है। यह एक बहुत ही घातक स्थिति है जहां लिवर काम करना लगभग बंद कर देता है।

⚪ लिवर फेलियर (Liver Failure): सिरोसिस के बाद के चरण में लिवर पूरी तरह से खराब हो सकता है। इस स्थिति में रोगी का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी लिवर ट्रांसप्लांट या प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

⚪ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं: फैटी लिवर के कारण डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।


👉 फैटी लिवर के लक्षण

शुरुआती चरण में फैटी लिवर का कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। इसलिए बहुत से लोग इस बीमारी के बारे में नहीं जान पाते। लेकिन जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है, शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। जैसे—
◽ अत्यधिक थकान: थोड़ा काम करने पर या बिना काम किए भी बहुत थकान महसूस होना। ऐसा लगना जैसे शरीर में ताकत ही नहीं है।
◽ पेट के दाईं ओर दर्द या बेचैनी: पेट के ऊपरी हिस्से में दाईं ओर (जहां लिवर होता है) दर्द होना या भारीपन महसूस होना। कभी-कभी पेट फूला हुआ लगता है।
◽ भूख कम लगना: खाने-पीने के प्रति रुचि कम हो जाती है। नतीजतन, वजन तेजी से घटने लगता है।
◽ उल्टी जैसा महसूस होना: बीच-बीच में उल्टी जैसा लगता है या उल्टी होती है।
◽ त्वचा या आंखें पीली होना: लिवर की हालत ज्यादा खराब होने पर पीलिया (Jaundice) के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली पड़ जाती है।
◽ पैरों या पेट में पानी जमा होना: गंभीर स्थिति में पेट में पानी जमा हो सकता है (Ascites)। दोनों पैर भी सूज सकते हैं (Edema)।
◽ मानसिक भ्रम: लिवर की विषैले पदार्थों को साफ करने की क्षमता कम होने पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। जिससे याददाश्त कम होना या भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
◽ त्वचा पर धब्बे: त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी लाल नसें दिखाई दे सकती हैं।


🔴 किन खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए?

फैटी लिवर को नियंत्रित करने के लिए खान-पान में बदलाव लाना सबसे जरूरी है। जो खाद्य पदार्थ लिवर में चर्बी जमा करने में मदद करते हैं, उन्हें पूरी तरह से त्यागना होगा।

⚪ शराब: जिन्हें एल्कोहॉलिक फैटी लिवर है, उन्हें शराब पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए। यहां तक कि नॉन-एल्कोहॉलिक रोगियों के लिए भी शराब पीना बहुत हानिकारक है। यह लिवर की कोशिकाओं को तेजी से नष्ट करता है।

⚪ चीनी या मीठा भोजन: अतिरिक्त चीनी लिवर में चर्बी बढ़ाती है। इसलिए मिठाई, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, चॉकलेट आदि से परहेज करें। चाय में चीनी लेना बंद कर दें।

⚪ कोल्ड ड्रिंक्स (Cold Drinks/Soda): बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के सोडा या कोल्ड ड्रिंक्स में प्रचुर मात्रा में फ्रुक्टोज होता है। यह लिवर के लिए जहर का काम करता है।

⚪ तला-भुना भोजन (Deep Fried Foods): तेल में डीप फ्राई किया हुआ भोजन जैसे— पकौड़े, समोसे, फ्रेंच फ्राइज, पूरी आदि में अत्यधिक ट्रांस फैट (Trans Fat) होता है। यह लिवर की सूजन बढ़ाता है।

⚪ प्रोसेस्ड फूड (Processed Foods): पैकेट बंद चिप्स, बिस्कुट, मैगी, बर्गर, पिज्जा आदि में नमक, चीनी और प्रिजर्वेटिव्स (Preservatives) ज्यादा होते हैं। ये लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं।

⚪ रेड मीट (Red Meat): गाय, बकरे या सूअर के मांस में चर्बी की मात्रा ज्यादा होती है। इसके बदले घर का बना चिकन या छोटी मछली खा सकते हैं।

⚪ मैदा से बनी चीजें: मैदा से बनी चीजें जैसे- सफेद ब्रेड, नान, पराठा आदि आसानी से पच तो जाते हैं लेकिन ये शरीर में शुगर का स्तर बढ़ा देते हैं। जिससे लिवर में फैट जमा होता है।

⚪ अत्यधिक नमक: भोजन में नमक की मात्रा कम करनी चाहिए। कच्चा नमक खाना बिल्कुल बंद कर दें। अत्यधिक सोडियम शरीर में पानी जमा होने की समस्या पैदा कर सकता है।




👉 क्या करना चाहिए? (जीवनशैली में बदलाव)

सिर्फ खाना छोड़ने से ही नहीं होगा, दैनिक जीवन में कुछ विशेष नियमों का पालन करने से ही फैटी लिवर से छुटकारा पाया जा सकता है।
◽ वजन कम करना चाहिए: यदि आपका वजन ज्यादा है, तो वजन कम करना ही पहला काम है। शरीर का कुल वजन 10% कम करने से ही लिवर की चर्बी काफी हद तक कम हो जाती है। लेकिन याद रखें, वजन धीरे-धीरे कम करना चाहिए। अचानक तेजी से वजन कम करने पर समस्या बढ़ सकती है।
◽ नियमित व्यायाम: प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट पैदल चलें या व्यायाम करें। दौड़ना, तैरना, योगासन या साइकिल चलाना लिवर के लिए बहुत लाभकारी है। यह इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाता है और लिवर की चर्बी गलाने में मदद करता है।
◽ प्रचुर मात्रा में पानी पीना: दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी शरीर के विषैले पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकाल देता है।
◽ पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे अच्छी नींद लेना जरूरी है। नींद कम होने पर शरीर में मेटाबॉलिक समस्याएं होती हैं, जो लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं।
◽ रात का खाना जल्दी खाएं: सोने जाने से कम से कम 2-3 घंटे पहले रात का खाना खा लें। रात में भारी भोजन न करें।
◽ नियमित स्वास्थ्य जांच: डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) या अल्ट्रासोनोग्राफी करवानी चाहिए।


🔴 फैटी लिवर में लाभकारी कुछ विशेष खाद्य पदार्थ

जो खाद्य पदार्थ लिवर को स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं, उन्हें अपनी दैनिक सूची में शामिल करें।
⚪ हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, ब्रोकली, पत्तागोभी, करेला आदि सब्जियों में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये लिवर में चर्बी जमा नहीं होने देते।
⚪ हल्दी: हल्दी में मौजूद 'करक्यूमिन' (Curcumin) नामक तत्व लिवर की कोशिकाओं को सुरक्षा देता है।
⚪ लहसुन: लहसुन में सेलेनियम और एलिसिन होता है। यह लिवर के एंजाइम को सक्रिय करता है, जिससे विषैले पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
⚪ नींबू: विटामिन-सी युक्त नींबू या खट्टे फल लिवर के लिए अच्छे होते हैं। यह लिवर को डिटॉक्स (Detox) करने में मदद करता है। लेकिन इसे पानी के साथ या जूस बनाकर सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में लेना चाहिए।
⚪ कॉफी: विभिन्न शोधों में देखा गया है कि ब्लैक कॉफी (बिना चीनी की) लिवर की बीमारियों का खतरा कम करती है।
⚪ जैतून का तेल या सरसों का तेल: खाना पकाने में वनस्पति या रिफाइंड तेल के स्थान पर कम मात्रा में सरसों का तेल या जैतून का तेल (Olive Oil) इस्तेमाल करें।
⚪ ओट्स (Oats): फाइबर युक्त भोजन लिवर के लिए अच्छा होता है। नाश्ते में ओट्स खाने से लाभ मिलता है।


🟢 श्रेष्ठ आयुर्वेदिक दवाएं और उपचार
आयुर्वेद में लिवर की समस्याओं को 'यकृत रोग' कहा जाता है। इसका मुख्य कारण 'पित्त' दोष का असंतुलन है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में कुछ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है जो लिवर को पुनर्जीवित कर सकती हैं।
नीचे कुछ अत्यंत प्रभावशाली आयुर्वेदिक दवाओं का उल्लेख किया गया है:

(1) कुटकी (Kutki - Picrorhiza kurroa):
   फैटी लिवर और पीलिया के लिए कुटकी एक महाऔषधि है। यह लिवर की कोशिकाओं को विषैले पदार्थों से बचाती है। इसका स्वाद कड़वा होता है लेकिन यह पित्त दोष को संतुलित करने में मदद करती है। यह लिवर की सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है।
   सेवन विधि: आधा चम्मच कुटकी का पाउडर शहद या पानी के साथ मिलाकर दिन में दो बार खा सकते हैं।
 
(2) कालमेघ (Kalmegh - Andrographis paniculata):
   कालमेघ को 'लिवर टॉनिक' कहा जाता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन नाशक) गुण होते हैं। यह वायरल हेपेटाइटिस और फैटी लिवर जैसी समस्याओं में बहुत लाभकारी है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
   सेवन विधि: कालमेघ के पत्तों का रस या इसका पाउडर डॉक्टर की सलाह के अनुसार लेना चाहिए।

(3) त्रिफला (Triphala):
   आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण त्रिफला है। यह शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण यह लिवर की सुरक्षा करता है। कब्ज दूर करने में भी यह सहायक है।
   सेवन विधि: रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला पाउडर गर्म पानी के साथ लेना चाहिए।

(4) गिलोय (Giloy - Tinospora cordifolia):
   गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यह लिवर को मजबूत करता है। इसके डिटॉक्सिफाइंग गुण लिवर से दूषित पदार्थों को बाहर निकालते हैं।
   सेवन विधि: गिलोय का रस या टैबलेट नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं।

(5) भूमि आंवला (Bhumi Amla - Phyllanthus niruri):
   लिवर की किसी भी समस्या के लिए भूमि आंवला एक उत्तम औषधि है। विशेषकर हेपेटाइटिस बी, सी और फैटी लिवर में यह जादुई काम करता है। यह लिवर की कोशिकाओं के पुनर्गठन में मदद करता है।
   सेवन विधि: इस पौधे के छोटे-छोटे पत्ते होते हैं। इसका रस निकालकर या पाउडर बनाकर सेवन किया जाता है।

(6) घृतकुमारी (Aloe Vera):
   एलोवेरा या घृतकुमारी का रस लिवर के लिए बहुत लाभकारी है। यह लिवर को ठंडा रखता है और शरीर की गर्मी कम करता है।
   सेवन विधि: प्रतिदिन सुबह खाली पेट 20-30 मिलीलीटर एलोवेरा जूस पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।

(7) पुनर्नवा (Punarnava):
   नाम ही इसका अर्थ बताता है— 'पुनः नया करना'। यह लिवर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है। लिवर में चर्बी जमा होना और पानी जमा होने की समस्या में यह बहुत प्रभावशाली है।
   सेवन विधि: पुनर्नवा की जड़ या पत्तों का रस उपयोग किया जाता है।


(8) पंचकर्म चिकित्सा (Panchakarma Therapy):
   सिर्फ दवा ही नहीं, आयुर्वेद में 'विरेचन' (Virechana) नामक एक प्रक्रिया है। इसके द्वारा शरीर से दूषित पित्त बाहर निकाला जाता है। फैटी लिवर के रोगियों के लिए यह थेरेपी अत्यंत लाभदायक है। लेकिन इसके लिए अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख आवश्यक है।


🔴 सावधानी

फैटी लिवर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव आपको इस बीमारी से मुक्त कर सकते हैं। घरेलू या आयुर्वेदिक दवा लेने से पहले एक अनुभवी चिकित्सक की सलाह लेना वांछनीय है। क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर का प्रकार (Body Type) अलग-अलग होता है। सही मात्रा और सही दवा के चुनाव से ही इसका लाभ मिलता है।
आपका लिवर आपका जीवन है। स्वस्थ खान-पान अपनाएं, शराब छोड़ें और नियमित रूप से व्यायाम करें। प्रकृति में उपलब्ध इन जड़ी-बूटियों का सही उपयोग आपके लिवर को स्वस्थ रखने में निश्चित रूप से मदद करेगा।

(नोट: यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए दी गई है। यह डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है। कोई भी दवा खाने से पहले चिकित्सक से संपर्क करें।)