जूँ के कारण ओडिशा के पुरी में 12 वर्षीय लक्ष्मीप्रिया की मौत!
(अनुराधा दास)
ओडिशा के पुरी में हुई 12 वर्षीय लक्ष्मीप्रिया की करुण मृत्यु ने हम सभी को चौंका दिया है।
आमतौर पर हम सिर की जूँ को केवल एक सामान्य और कष्टप्रद समस्या मानते हैं। लेकिन यह छोटा सा परजीवी कभी मौत का कारण बन सकता है, इस पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता। लक्ष्मीप्रिया के मामले में, अत्यधिक जूँ के कारण सिर की त्वचा में गंभीर संक्रमण (Infection) हो गया था, जिसके परिणामस्वरूप उसके शरीर में विष का प्रभाव शुरू हुआ और अंततः उसे अकाल मृत्यु को गले लगाना पड़ा।
यह घटना समझाती है कि शरीर की छोटी-छोटी समस्याओं को भी कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नीचे इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई है— जूँ कैसे जानलेवा हो सकती हैं, इसके लक्षण क्या हैं, और इसे खत्म करने के घरेलू तथा आधुनिक उपचार क्या हैं।
⚪ सिर की जूँ क्या है और यह जानलेवा कैसे हो सकती है?
जूँ मनुष्य के सिर की त्वचा (scalp) पर रहने वाला एक छोटा परजीवी (Parasite) है। यह मनुष्य के सिर की त्वचा से खून चूसकर जीवित रहता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे Pediculus humanus capitis कहा जाता है। आमतौर पर जूँ सीधे तौर पर कोई जानलेवा बीमारी पैदा नहीं करती, लेकिन इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव या 'साइड इफेक्ट्स' कभी-कभी भयानक हो सकते हैं। लक्ष्मीप्रिया की घटना इसका एक उदाहरण है।
◽ जूँ से होने वाली जटिलताएँ जो मृत्यु का कारण बन सकती हैं:
(1) रक्ताल्पता या एनीमिया (Anemia):
यदि किसी के सिर में हजारों जूँ हों और वे लंबे समय तक खून चूसती रहें, तो उस व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो सकती है। विशेषकर बच्चों के मामलों में यह तीव्र रक्ताल्पता या 'एनीमिया' का कारण बन सकता है। शरीर कमजोर हो जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
(2) सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Secondary Bacterial Infection):
जूँ के काटने से सिर में तेज खुजली होती है। नाखूनों से ज्यादा खुजलाने पर सिर की त्वचा फट जाती है और घाव हो जाते हैं। इन खुले घावों के जरिए स्टैफिलोकोकस (Staphylococcus) और स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus) नामक घातक बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। लक्ष्मीप्रिया के मामले में संभवतः ऐसा ही हुआ था।
(3) सेप्टीसीमिया या रक्त विषाक्तता (Septicemia/Sepsis):
जब सिर की त्वचा का संक्रमण खून में मिल जाता है, तो इसे सेप्टीसीमिया या सेप्सिस कहा जाता है। यह एक आपातकालीन चिकित्सा स्थिति है। खून में जहर फैलने पर यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे— किडनी, लिवर और हृदय को विफल (fail) कर सकता है। चूँकि लक्ष्मीप्रिया को उल्टी और खून की उल्टी हुई थी, इसका मतलब है कि संक्रमण उसके पूरे शरीर में फैल गया था और उसके अंग विफल (Multiple Organ Failure) होने लगे थे।
(4) मानसिक तनाव और नींद की कमी:
अत्यधिक खुजली के कारण रोगी की नींद खराब होती है। लंबे समय तक नींद न आने से शरीर और मस्तिष्क कमजोर हो जाते हैं, जो किसी भी संक्रमण से लड़ने में बाधा उत्पन्न करता है।
◽ लक्षण (Symptoms)
जूँ होने के शुरुआती लक्षणों को पहचानना अत्यंत आवश्यक है ताकि यह भयानक रूप न ले सके।
◽ तेज खुजली: सिर के तालू, गर्दन के पीछे और कानों के आसपास प्रचंड खुजली होना।
◽ लीख या जूँ के अंडे: बालों की जड़ों में सफेद रंग के छोटे अंडे (लीख) दिखाई देना। ये रूसी (dandruff) की तरह झाड़ने पर गिरते नहीं हैं, बल्कि बालों से चिपके रहते हैं।
◽ लाल चकत्ते या फोड़े: खुजली के कारण सिर में छोटे-छोटे लाल दाने या घाव हो जाना।
◽ लिम्फ नोड्स या ग्रंथियों में सूजन: यदि संक्रमण अधिक हो, तो गर्दन के पीछे या कान के नीचे की ग्रंथियां सूज सकती हैं और उनमें दर्द हो सकता है।
◽ बेचैनी: विशेषकर छोटे बच्चे जूँ की परेशानी के कारण पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते और चिड़चिड़े हो जाते हैं।
⚪ जूँ को कैसे खत्म किया जा सकता है?
जूँ को जड़ से खत्म करने के लिए धैर्य और नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है। इसका इलाज घरेलू तरीकों और डॉक्टरी (एलोपैथिक) दोनों तरीकों से किया जा सकता है।
🟢 घरेलू उपचार (Home Remedies)
प्राचीन काल से ही हमारे समाज में जूँ मारने के लिए विभिन्न औषधीय तरीकों का उपयोग होता आ रहा है। इनके दुष्प्रभाव (Side effects) कम होते हैं और ये बालों के लिए भी लाभकारी हैं।
(1) नीम के पत्तों का उपयोग:
नीम के पत्ते एक शक्तिशाली एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल तत्व हैं।
⚪ विधि: मुट्ठी भर नीम के पत्तों को अच्छी तरह धोकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सिर की त्वचा और बालों में अच्छी तरह लगाकर 1 घंटा रखें। उसके बाद शैम्पू से धो लें। सप्ताह में दो बार ऐसा करने से जूँ मरने के साथ-साथ सिर के घाव या संक्रमण भी ठीक होते हैं।
(2) नारियल तेल और कपूर:
नारियल तेल जूँ की सांस बंद कर देता है और कपूर की गंध जूँ बर्दाश्त नहीं कर पातीं।
⚪ विधि: थोड़े से नारियल तेल में कपूर का एक टुकड़ा पीसकर मिला लें। रात को सोने से पहले इस तेल से सिर की मालिश करें। अगली सुबह बारीक कंघी से बालों को झाड़कर जूँ निकाल दें।
(3) प्याज का रस:
प्याज के रस में मौजूद सल्फर की तेज गंध जूँ मारने में मदद करती है।
⚪ विधि: दो या तीन प्याज पीसकर उसका रस निकाल लें। इस रस को सिर की त्वचा पर लगाकर 30-40 मिनट के लिए ढककर रखें। इसके बाद गुनगुने पानी से सिर धो लें।
(4) सिरका (White Vinegar):
सिरके में मौजूद एसिटिक एसिड जूँ के अंडों या लीखों को बालों से अलग करने में मदद करता है।
⚪ विधि: बराबर मात्रा में पानी और सिरका मिलाकर बालों में लगाने से लीखें आसानी से निकल आती हैं।
(5) टी ट्री ऑयल (Tea Tree Oil):
इस तेल में प्राकृतिक रूप से कीटनाशक गुण होते हैं।
⚪ विधि: अपने नियमित शैम्पू या तेल के साथ कुछ बूंदें टी ट्री ऑयल मिलाकर इस्तेमाल करें।
(6) गीली कंघी विधि (Wet Combing):
दवा से भी ज्यादा जरूरी है जूँ और लीखों को बालों से शारीरिक रूप से हटाना।
⚪ विधि: बाल धोने के बाद जब बाल गीले हों, तब कंडीशनर लगाकर बारीक दांतों वाली कंघी से बाल झाड़ें। गीली अवस्था में जूँ हिल-डुल नहीं पातीं, जिससे वे आसानी से कंघी में आ जाती हैं।
🟢 एलोपैथिक उपचार (Allopathic Treatment)
यदि घरेलू तरीकों से जूँ नहीं जातीं या संक्रमण अधिक हो जाता है, तो तुरंत डॉक्टरी इलाज की आवश्यकता होती है।
(1) मेडिकेटेड शैम्पू और लोशन (Medicated Shampoos/Lotions):
डॉक्टर आमतौर पर ‘परमेथ्रिन’ (Permethrin 1%) युक्त लोशन या शैम्पू इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
◽ उपयोग विधि: इन्हें आमतौर पर सिर में लगाकर 10 मिनट के लिए रखना होता है और फिर धो लेना होता है। 7 दिन बाद फिर से एक बार इस्तेमाल करना चाहिए ताकि अंडों से निकलने वाली नई जूँ भी मर जाएं।
(2) आइवरमेक्टिन (Ivermectin):
जिन लोगों को जूँ की समस्या बहुत गंभीर है या बाहरी दवा काम नहीं करती, उन्हें डॉक्टर आइवरमेक्टिन नामक टैबलेट खाने को दे सकते हैं।
◽ सावधानी: यह दवा डॉक्टर की सलाह के बिना कभी नहीं खानी चाहिए, विशेषकर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को।
(3) एंटीबायोटिक्स (Antibiotics):
लक्ष्मीप्रिया की तरह यदि किसी के सिर में खुजली से घाव हो जाएं या बैक्टीरियल इन्फेक्शन हो जाए, तो तुरंत एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है। यह खून में जहर (Sepsis) फैलने से बचाता है।
⚪ रोकथाम और जागरूकता (Prevention)
जूँ होना शर्म की बात नहीं है, लेकिन इसे छिपाकर रखना और इलाज न करना मूर्खता है। जूँ संक्रमण रोकने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना चाहिए:
(1) व्यक्तिगत सामान साझा न करें: कंघी, टोपी, तौलिया, हेयरबैंड या हेलमेट दूसरों के साथ बार-बार बदलकर इस्तेमाल न करें।
(2) नियमित जाँच: स्कूल जाने वाले बच्चों के सिर की जाँच माता-पिता को सप्ताह में एक बार जरूर करनी चाहिए। यदि एक या दो जूँ दिखाई दें, तो तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए।
(3) साफ-सफाई: जूँ वाले व्यक्ति की बेडशीट, तकिए के कवर और कपड़ों को गर्म पानी से धोना चाहिए। गर्म पानी (कम से कम 60° सेल्सियस) में जूँ और उनके अंडे मर जाते हैं।
(4) बाल बांधकर रखना: स्कूल जाने वाली लड़कियों के बाल लंबे हों तो चोटी गूँथकर भेजना बेहतर है। बाल खुले रखने पर जूँ फैलने की संभावना अधिक रहती है।
जूँ केवल एक परजीवी ही नहीं है, लापरवाही करने पर यह एक सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। लक्ष्मीप्रिया की घटना ने हमें सिखा दिया है कि "इलाज से बेहतर बचाव है"। जब भी सिर में खुजली शुरू हो या घाव दिखाई दें, तभी सतर्क हो जाना चाहिए।
सलाह: यदि आपके या आपके बच्चे के सिर में अत्यधिक जूँ हैं और बुखार, उल्टी, या गर्दन की ग्रंथियों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें और तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। सही समय पर सही इलाज ही हमारे प्रियजन की जान बचा सकता है।
(उपरोक्त जानकारी सामान्य ज्ञान और जागरूकता के लिए दी गई है। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।)