किन ग्रहोंदोष के कारण मनुष्य की स्मृति शक्ति- एकाग्रता कमजोर और अकेलापन होती है?
( Apurba Das )
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य की स्मृति शक्ति (Memory Power), मानसिक संतुलन, एकाग्रता और तनाव का गहरा संबंध ग्रहों की स्थिति, दशा–अंतरदशा और कुंडली के भावों से होता है। जब कुछ विशेष ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं या उनकी दशा चल रही होती है, तब व्यक्ति की स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है और मानसिक तनाव, चिंता, डर, भ्रम जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
नीचे विस्तार से बताया गया है कि कौन-कौन से ग्रह स्मृति शक्ति को कमजोर करते हैं और मानसिक तनाव बढ़ाते हैं, साथ ही उनके ज्योतिषीय और व्यावहारिक उपाय भी दिए गए हैं।
1. चंद्र ग्रह की अशुभ दशा – स्मृति और मन पर सबसे अधिक प्रभाव
• चंद्रमा को मन, भावना, स्मृति और मानसिक शांति का कारक माना गया है।
◽चंद्र की अशुभ दशा में लक्षण
• बातों को भूल जाना
• पढ़ा हुआ याद न रहना
• अत्यधिक भावुकता
• अनिद्रा
• बार-बार चिंता और भय
• डिप्रेशन और मूड स्विंग
यदि कुंडली में चंद्र नीच का हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो या चंद्र की महादशा/अंतरदशा चल रही हो, तो स्मृति शक्ति पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
◽चंद्र के उपाय
• “ॐ सोम सोमाय नमः” ( हर दिन 108 बार जाप )
• सोमवार को सफेद वस्त्र धारण करें
• दूध, चावल, मिश्री का दान
• माता का सम्मान और सेवा
• पूर्णिमा के दिन चंद्र दर्शन कर जल अर्पित करें
2. बुध ग्रह की अशुभ दशा –
बुद्धि और एकाग्रता का ह्रास। बुध ग्रह बुद्धि, तर्क शक्ति, स्मरण क्षमता, पढ़ाई और निर्णय क्षमता का कारक है।
◽बुध खराब होने पर
• दिमाग का कमजोर होना
• पढ़ाई में मन न लगना
• निर्णय लेने में कठिनाई
• बोलते समय शब्द भूल जाना
• मानसिक भ्रम और घबराहट
विशेष रूप से छात्रों में बुध की खराब दशा स्मृति शक्ति को बहुत कमजोर कर देती है।
◽बुध के उपाय
• “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप ( हर दिन 108 बार )
• बुधवार को हरे वस्त्र पहनें
• हरी मूंग, हरा धनिया दान करें
• गणेश जी की पूजा
• झूठ और छल नहीं करना चाहिए
3. शनि ग्रह की अशुभ दशा – मानसिक दबाव और नकारात्मक सोच। शनि को कर्म, भय, तनाव और अवसाद से जोड़ा जाता है।
◽शनि की दशा में
• भारीपन महसूस होना
• नकारात्मक विचार
• अकेलापन
• डर और तनाव
• स्मरण शक्ति का धीमा होना
शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या में मानसिक दबाव अत्यधिक बढ़ सकता है।
◽शनि के उपाय
• “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप ( हर दिन 108 बार )
• शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल दान
• पीपल के वृक्ष की पूजा
• बुजुर्गों और गरीबों की सेवा
• नशे से दूर रहें
4. राहु ग्रह की अशुभ दशा – भ्रम और मानसिक अशांति
राहु को भ्रम, डर, वहम और अस्थिर मानसिकता का ग्रह माना जाता है।
◽राहु की खराब दशा में
• अनावश्यक डर
• गलत सोच ( कुकर्म )
• स्मरण शक्ति कमजोर
• चिड़चिड़ापन ( अत्यधिक क्रोधी होना )
• पैनिक अटैक
राहु की दशा में व्यक्ति मानसिक रूप से बहुत परेशान रह सकता है।
◽राहु के उपाय
• “ॐ राहवे नमः” मंत्र ( हर दिन 108 बार )
• शनिवार या बुधवार को नारियल का दान
• दुर्गा माता की पूजा
• नकारात्मक संगति से दूरी
5. केतु ग्रह की अशुभ दशा – मानसिक शून्यता और एकाग्रता की कमी । केतु ग्रह विरक्ति, भ्रम और मानसिक विच्छेदन का कारक है।
◽केतु के प्रभाव
• पढ़ाई में मन न लगना
• बातों को याद न रख पाना
• मानसिक खालीपन
• अकेलापन
◽केतु के उपाय
• “ॐ केतवे नमः” मंत्र ( हर दिन 108 बार )
• गणेश जी की पूजा
• कुत्तों को भोजन कराना
• ध्यान और मेडिटेशन
◽स्मृति शक्ति बढ़ाने के सामान्य उपाय
ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ कुछ व्यावहारिक उपाय भी अत्यंत आवश्यक हैं:
• रोज 10–15 मिनट ध्यान (Meditation)
• प्राणायाम, विशेषकर अनुलोम-विलोम
• मोबाइल का सीमित उपयोग
• पर्याप्त नींद ( दैनिक सात - आठ घंटा )
• सात्विक भोजन
• सकारात्मक सोच
ज्योतिष के अनुसार चंद्र, बुध, शनि, राहु और केतु की अशुभ दशाएँ स्मृति शक्ति को कमजोर करती हैं और मानसिक तनाव को बढ़ाती हैं। लेकिन सही मंत्र, दान, पूजा और जीवनशैली सुधार से इन नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
यदि समस्या अधिक गंभीर हो तो कुंडली विश्लेषण कराकर व्यक्तिगत उपाय करना सबसे श्रेष्ठ रहता है।