गर्भवती महिलाओं को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए? सावधान रहिए
(लेखक: अपूर्व दास)
गर्भावस्था एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस दौरान महिला के शरीर में न केवल हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का संपूर्ण विकास भी मां के खान-पान पर निर्भर करता है। कई बार अनजाने में खाई गई कुछ चीजें गर्भस्थ शिशु और मां दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, इसकी सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
1. कच्चा पपीता
कच्चा पपीता गर्भावस्था में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला फल है। इसमें लेटेक्स और पेपैन नामक तत्व पाए जाते हैं। ये दोनों ही गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन बढ़ा सकते हैं।
इससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषकर पहले तीन महीनों (पहली तिमाही) में कच्चा पपीता अत्यंत जोखिम भरा माना जाता है।
ध्यान दें कि पूरी तरह पका हुआ पपीता सीमित मात्रा में कभी-कभी सुरक्षित हो सकता है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन न करें।
2. अनानास
अनानास में ब्रोमेलैन (Bromelain) नामक एंजाइम पाया जाता है। यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) को नरम कर सकता है। अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से समय से पहले प्रसव या गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है। शुरुआती महीनों में अनानास से पूरी तरह बचना ही बेहतर होता है।
3. सुशी मछली और बासी मांस
सुशी, कच्चा या अधपका मांस और मछली गर्भावस्था में बेहद खतरनाक हो सकता है। इनमें लिस्टरिया, साल्मोनेला और टोक्सोप्लाज्मा जैसे बैक्टीरिया और परजीवी पाए जा सकते हैं। ये संक्रमण मां के लिए तो हानिकारक हैं ही, साथ ही शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। गर्भावस्था में केवल अच्छी तरह पका हुआ मांस ही खाना चाहिए।
4. अधपके और कच्चे अंडे
कच्चे या अधपके अंडों में गंभीर संक्रमण का खतरा होता है।
इनमें साल्मोनेला बैक्टीरिया पाया जा सकता है। यह फूड पॉइजनिंग, तेज बुखार, उल्टी और डायरिया का कारण बन सकता है।
• इसके अलावा, मेयोनीज, कच्चे अंडे से बनी मिठाइयां, हाफ बॉयल अंडे से भी परहेज करना चाहिए। हमेशा अंडों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
5. कैफीन (चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक)
गर्भावस्था में अत्यधिक कैफीन का सेवन नुकसानदायक होता है। ज्यादा कैफीन से गर्भस्थ शिशु का वजन कम हो सकता है। गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक कैफीन नहीं लेना चाहिए।
इसलिए ज्यादा चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक से बचें।
6. शराब (Alcohol)
गर्भावस्था में शराब पूरी तरह निषिद्ध है। शराब गर्भनाल (Placenta) के माध्यम से सीधे शिशु तक पहुंचती है। इससे फीटल अल्कोहल सिंड्रोम हो सकता है।
इसके परिणामस्वरूप -
• शिशु का मानसिक विकास रुक सकता है,
• चेहरे और अंगों में विकृति आ सकती है,
• जीवनभर सीखने में कठिनाई हो सकती है।
• यहां तक कि थोड़ी मात्रा में शराब भी सुरक्षित नहीं मानी जाती।
7. अधपका या बासी भोजन
स्ट्रीट फूड, बासी खाना और अधपका भोजन गर्भवती महिला के लिए खतरनाक हो सकता है। इनमें बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं।
फूड पॉइजनिंग से मां को डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है, जिसका असर बच्चे पर भी पड़ता है।
8. कच्ची या अधधुली सब्जियां
हरी सब्जियां सेहतमंद होती हैं, लेकिन यदि ठीक से न धोई जाएं तो इनमें मिट्टी और कीटाणु हो सकते हैं। इससे टोक्सोप्लाज्मोसिस जैसे संक्रमण का खतरा रहता है। सलाद खाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
9. अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड
चिप्स, नमकीन, पैकेट वाला खाना और फास्ट फूड:
• हाई ब्लड प्रेशर,
• सूजन (एडेमा),
• प्री-एक्लेम्पसिया का कारण बन सकते हैं।
10. आयुर्वेदिक या हर्बल दवाएं बिना सलाह
कई महिलाएं गर्भावस्था में घरेलू नुस्खे या जड़ी-बूटियों का सेवन करने लगती हैं। कुछ जड़ी-बूटियां गर्भाशय को उत्तेजित कर सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह कोई भी हर्बल दवा न लें।
गर्भावस्था में “थोड़ी सी लापरवाही” भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि भोजन ताजा, स्वच्छ और अच्छी तरह पका हुआ हो। संदिग्ध खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
किसी भी नए भोजन या सप्लीमेंट को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
सही खान-पान न केवल मां को स्वस्थ रखता है, बल्कि गर्भस्थ शिशु के सुरक्षित और संपूर्ण विकास की नींव भी मजबूत करता है। सावधान रहें, सतर्क रहें और एक स्वस्थ मातृत्व की ओर कदम बढ़ाएं।