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বিজ্ঞাপন

किन गोहो दोष के कारण एक मनुष्य चरित्रहीन बन जाते हैं?




किन गोहो दोष के कारण एक मनुष्य चरित्रहीन बन जाते हैं? 

( अपूर्व दास )


ज्योतिष शास्त्र में मनुष्य के चरित्र, सोच और व्यवहार को उसकी जन्मकुंडली में स्थित ग्रहों, भावों और योगों से जोड़ा जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या ग्रह दोष के कारण कोई पुरुष या नारी “चरित्रहीन” हो सकता है? इस विषय को समझने के लिए हमें ज्योतिष की गहराई, मनोविज्ञान और सामाजिक परिस्थितियों—तीनों को संतुलित रूप से देखना होगा।





🔴 चरित्रहीनता का अर्थ क्या है?

सबसे पहले यह समझना आवश्यक है कि “चरित्रहीनता” एक सामाजिक और नैतिक अवधारणा है। इसका अर्थ केवल यौन व्यवहार से नहीं, बल्कि व्यक्ति की निष्ठा, ईमानदारी, आत्मसंयम और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा होता है। ज्योतिष किसी को जन्म से अच्छा या बुरा घोषित नहीं करता, बल्कि यह बताता है कि व्यक्ति में कौन-से प्रवृत्तिगत झुकाव (tendencies) प्रबल हो सकते हैं।







🔴 कुंडली में चरित्र से जुड़े मुख्य भाव ज्योतिष में कुछ भाव ऐसे माने गए हैं जो व्यक्ति के चरित्र और संबंधों को प्रभावित करते हैं:

लग्न भाव – व्यक्तित्व और स्वभाव
पंचम भाव – प्रेम, आकर्षण और भावनाएँ
सप्तम भाव – विवाह और दांपत्य जीवन
अष्टम भाव – गुप्त इच्छाएँ और रहस्य
द्वादश भाव – भोग, व्यसन और गोपनीय संबंध


यदि इन भावों पर पाप ग्रहों का अधिक प्रभाव हो और शुभ ग्रहों का सहयोग न मिले, तो व्यक्ति में असंतुलन आ सकता है।



🔴 किन ग्रहों को दोष का कारण माना जाता है?

• शुक्र ग्रह

शुक्र प्रेम, सौंदर्य, कामना और भोग का कारक ग्रह है। यदि शुक्र अत्यधिक पीड़ित हो, राहु या केतु से ग्रसित हो, या अष्टम/द्वादश भाव में चला जाए, तो व्यक्ति में अत्यधिक भोग-विलास, अस्थिर प्रेम संबंध या आकर्षण की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

• राहु

राहु भ्रम, छल, असंतोष और वर्जनाओं को तोड़ने वाला ग्रह माना जाता है। यदि राहु सप्तम, पंचम या द्वादश भाव में हो, तो व्यक्ति गोपनीय संबंधों, दिखावे या सामाजिक मर्यादाओं से हटकर व्यवहार कर सकता है।

• केतु

केतु वैराग्य का ग्रह है, लेकिन यदि यह शुक्र या चंद्र के साथ अशुभ स्थिति में हो, तो भावनात्मक भ्रम और संबंधों में दूरी ला सकता है।

• चंद्र ग्रह

चंद्र मन का कारक है। पीड़ित चंद्रमा व्यक्ति को मानसिक रूप से अस्थिर, भावुक और निर्णयहीन बना सकता है, जिससे वह गलत संबंधों में फँस सकता है।

🔴 क्या केवल ग्रह दोष ही जिम्मेदार हैं?

ज्योतिष स्वयं यह मानता है कि ग्रह केवल प्रवृत्ति दिखाते हैं, बाध्यता नहीं। किसी पुरुष या नारी का चरित्र कैसा होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है:

• पारिवारिक संस्कार
• शिक्षा और सामाजिक वातावरण
• आत्मनियंत्रण और विवेक
• जीवन के अनुभव

एक ही ग्रह योग दो लोगों में अलग-अलग परिणाम दे सकता है। कोई व्यक्ति ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव पर संयम रख लेता है, तो कोई बह जाता है।



🔴 पुरुष और नारी—दोनों पर समान प्रभाव

यह मानना गलत है कि ग्रह दोष केवल नारी को ही “चरित्रहीन” बनाते हैं। ज्योतिष में ग्रहों का प्रभाव लिंगभेद नहीं करता। पुरुष और स्त्री—दोनों की कुंडली में यदि समान दोष हों, तो दोनों में समान प्रवृत्तियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। अंतर केवल सामाजिक दृष्टिकोण का है, जहाँ स्त्री के आचरण को अधिक कठोरता से आँका जाता है।

🟢 क्या उपाय संभव हैं?
ज्योतिष का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि समाधान देना है। यदि कुंडली में अशुभ योग हों, तो:

• शुक्र, चंद्र या राहु के शांति उपाय
• मंत्र जप, दान और व्रत
• संयमित जीवनशैली और सात्त्विक आहार
• ध्यान और आत्मचिंतन


नीचे मैं ग्रह दोष के कारण मन में असंतुलन, गलत आकर्षण, या चरित्र से जुड़े दोष को शांत करने के लिए उपयुक्त मंत्र जप और दान स्पष्ट रूप से बता रहा हूँ। यह उपाय पुरुष और नारी—दोनों के लिए समान रूप से प्रभावी माने जाते हैं।

🟢 शुक्र ग्रह शांति (कामवासना, आकर्षण, भोग-विलास पर नियंत्रण)

मंत्र जप : ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
जप विधि: शुक्रवार के दिन, सफेद वस्त्र पहनकर , 108 बार , कम से कम 21 शुक्रवार। : दान - सफेद वस्त्र, चावल, दूध या दही , इत्र, 
कन्याओं को मिठाई।
लाभ: अत्यधिक कामवासना, गलत संबंधों की इच्छा और भटकाव में कमी आती है।

🟢 राहु ग्रह शांति (गुप्त संबंध, भ्रम, अनैतिक आकर्षण)

मंत्र जप: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
जप विधि: शनिवार या बुधवार , नीले या काले वस्त्र पहनकर 108 बार जप करें 18 या 40 दिन।
• दान - काला तिल, सरसों का तेल, नीला कपड़ा,नारियल, कुत्तों को रोटी।
• लाभ:
गुप्त इच्छाएँ, छल, झूठ और सामाजिक मर्यादा तोड़ने की प्रवृत्ति कम होती है।

🟢 चंद्र ग्रह शांति (मन की अस्थिरता, भावुकता)

• मंत्र जप : ॐ सों सोमाय नमः 

• जप विधि: सोमवार सफेद आसन पर बैठकर - 108 बार - 11 या 21 सोमवार | दान : दूध, चावल, सफेद मिठाई, जल से भरा पात्र।

• लाभ: मन शांत होता है, भावनात्मक कमजोरी और गलत निर्णय कम होते हैं।


🟢 केतु ग्रह शांति (अचानक आकर्षण, भावनात्मक कटाव)

• मंत्र जाप करें ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
• जप विधि: मंगलवार या गुरुवार , 108 बार, 18 दिन
• दान : कंबल, तिल, लोहा, भिखारी या साधु को भोजन
• लाभ: अचानक पैदा होने वाले गलत आकर्षण और मानसिक भ्रम से मुक्ति।

🟢 सर्वश्रेष्ठ सार्वभौमिक उपाय (बहुत प्रभावी)

• महामृत्युंजय मंत्र : ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

प्रतिदिन 1 माला (108 बार) ,स्नान के बाद, 40 दिन

• लाभ: मन, शरीर और आत्मा—तीनों को शुद्ध करता है। गलत प्रवृत्तियों से रक्षा करता है।

🔴 कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ : केवल मंत्र जप से सब ठीक नहीं होता, आचरण में भी संयम जरूरी है , नशा, अश्लील सामग्री और गलत संगति से दूर रहें, ब्रह्मचर्य और सात्त्विक भोजन बहुत सहायक होता है।


इनसे व्यक्ति अपने मन और इच्छाओं पर नियंत्रण पा सकता है।

अंततः यह कहना सही नहीं होगा कि ग्रह दोष किसी को चरित्रहीन बना देते हैं। ग्रह केवल व्यक्ति की मानसिक और भावनात्मक दिशा को प्रभावित करते हैं। सही संस्कार, विवेक और आत्मसंयम के बल पर कोई भी व्यक्ति ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को परास्त कर सकता है। ज्योतिष हमें चेतावनी देता है, मार्ग दिखाता है—लेकिन हमारे कर्म और निर्णय ही हमारे चरित्र का निर्माण करते हैं।



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