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বিজ্ঞাপন

एंटीबायोटिक-प्रतिरोध का बढ़ता खतरा: भारत में सुपरबग्स बनते जा रहे हैं गंभीर स्वास्थ्य चुनौती




एंटीबायोटिक-प्रतिरोध का बढ़ता खतरा: भारत में सुपरबग्स बनते जा रहे हैं गंभीर स्वास्थ्य चुनौती

( Anuradha Das )

भारत में हाल के वर्षों में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से उभरकर सामने आई है, जिसे एंटीबायोटिक-प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) कहा जाता है। हालिया शोध और रिपोर्टों के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है जहाँ ड्रग-रेज़िस्टेंट संक्रमण, जिन्हें आम भाषा में सुपरबग्स कहा जाता है, का स्तर बेहद चिंताजनक हो चुका है। यह स्थिति न केवल इलाज को कठिन बना रही है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को भी लगातार बढ़ा रही है।



◽क्या है एंटीबायोटिक-प्रतिरोध?

एंटीबायोटिक-प्रतिरोध वह स्थिति है जब बैक्टीरिया पर दवाओं का असर होना बंद हो जाता है। आमतौर पर एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारने या उनकी वृद्धि को रोकने का काम करती हैं, लेकिन जब इन दवाओं का जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, तो बैक्टीरिया खुद को बदल लेते हैं। नतीजा यह होता है कि साधारण संक्रमण भी गंभीर रूप ले लेते हैं और सामान्य दवाएँ बेअसर हो जाती हैं।

◽भारत में स्थिति क्यों गंभीर है?

भारत में एंटीबायोटिक-प्रतिरोध के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल। सर्दी, खांसी या बुखार जैसी सामान्य समस्याओं में भी लोग खुद ही दवा ले लेते हैं, जबकि कई बार ये बीमारियाँ वायरल होती हैं, जिनमें एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं होती। इसके अलावा अधूरा कोर्स लेना, यानी दवा बीच में छोड़ देना भी बैक्टीरिया को मजबूत बना देता है।

◽सुपरबग्स: इलाज की सबसे बड़ी चुनौती

ड्रग-रेज़िस्टेंट संक्रमण या सुपरबग्स ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जिन पर कई प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएँ काम नहीं करतीं। ऐसे संक्रमणों के इलाज में ज्यादा समय लगता है, महंगी दवाओं की जरूरत पड़ती है और कई मामलों में मरीज की जान भी खतरे में पड़ जाती है। अस्पतालों में भर्ती मरीज, बुजुर्ग, नवजात शिशु और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

◽इलाज महँगा और जटिल क्यों हो रहा है?

जब सामान्य दवाएँ असर नहीं करतीं, तो डॉक्टरों को नई और महँगी एंटीबायोटिक्स का सहारा लेना पड़ता है। कई बार मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च कई गुना बढ़ जाता है। यह समस्या केवल मरीज तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बोझ बन जाती है।

◽पशुपालन और खेती में दवाओं का दुरुपयोग

एंटीबायोटिक-प्रतिरोध बढ़ने का एक बड़ा कारण पशुपालन और खेती में भी दवाओं का अत्यधिक उपयोग है। जानवरों की तेजी से वृद्धि और बीमारियों से बचाव के लिए एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाएँ खाद्य श्रृंखला के माध्यम से इंसानों के शरीर में पहुँचती हैं और धीरे-धीरे प्रतिरोध को बढ़ावा देती हैं।

◽इस खतरे से कैसे बचा जा सकता है?

एंटीबायोटिक-प्रतिरोध को रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। एंटीबायोटिक दवाएँ केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए और पूरा कोर्स पूरा करना चाहिए। हाथों की स्वच्छता, साफ पानी, टीकाकरण और संक्रमण की रोकथाम भी इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को दवाओं के सही उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू करने होंगे।


एंटीबायोटिक-प्रतिरोध भारत के लिए एक धीमा लेकिन बेहद खतरनाक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में साधारण संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। जागरूकता, सही इलाज और जिम्मेदार व्यवहार ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।




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