( Apurba Das )
आज 4 फरवरी है, और पूरी दुनिया में 'विश्व कैंसर दिवस' (World Cancer Day) मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना, इसके लक्षणों की पहचान करना और इससे बचाव के उपाय साझा करना है। वर्तमान समय में कैंसर दुनिया भर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। लेकिन अगर सही समय पर इसका पता चल जाए और उचित इलाज मिले, तो इस बीमारी को हराया जा सकता है। आइए, इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
१. कैंसर क्या है? (What is Cancer?)
मानव शरीर असंख्य छोटी-छोटी कोशिकाओं (Cells) से बना है। सामान्य स्थिति में, शरीर की आवश्यकता के अनुसार ये कोशिकाएं विभाजित होती हैं और बढ़ती हैं। लेकिन जब शरीर के किसी हिस्से की कोशिकाओं पर शरीर का नियंत्रण खत्म हो जाता है और वे असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो उसे कैंसर कहा जाता है।
ये असामान्य कोशिकाएं मिलकर 'ट्यूमर' (Tumor) या गांठ का निर्माण करती हैं।
◽ट्यूमर दो प्रकार के हो सकते हैं:
• बिनाइन (Benign): ये कैंसर नहीं होते और शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैलते। इन्हें सर्जरी से हटाया जा सकता है।
• मैलिग्नेंट (Malignant): ये खतरनाक होते हैं और यही कैंसर का कारण बनते हैं। ये कोशिकाएं रक्त या लसीका (Lymph) के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में फैल सकती हैं।
२. कैंसर के प्रकार (Types of Cancer)
चिकित्सा विज्ञान में 100 से अधिक प्रकार के कैंसर की पहचान की गई है। इन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:
• कार्सिनोमा (Carcinoma): यह त्वचा या आंतरिक अंगों की परत में होता है। जैसे— फेफड़े, स्तन, और पेट का कैंसर।
• सारकोमा (Sarcoma): यह हड्डियों, मांसपेशियों, वसा, रक्त वाहिकाओं या संयोजी ऊतकों (Connective tissues) में होता है।
• ल्यूकेमिया (Leukemia): इसे 'ब्लड कैंसर' भी कहा जाता है। यह अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में शुरू होता है और इसमें ट्यूमर नहीं बनता, बल्कि असामान्य रक्त कोशिकाएं बनती हैं।
• लिम्फोमा (Lymphoma): यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को प्रभावित करता है।
◽भारत में सामान्य रूप से पाए जाने वाले कैंसर:
• मुंह का कैंसर (तंबाकू के सेवन के कारण)।
• स्तन कैंसर (महिलाओं में)।
• फेफड़ों का कैंसर।
• गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर (Cervical Cancer)।
३. कैंसर के लक्षण (Symptoms)
कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह शरीर के किस हिस्से में है। फिर भी, कुछ सामान्य लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
• शरीर में गांठ या सूजन: स्तन या शरीर के किसी अन्य हिस्से में असामान्य गांठ महसूस होना।
• घाव का ठीक न होना: मुंह के अंदर या शरीर पर कोई ऐसा घाव जो लंबे समय से ठीक न हो रहा हो।
• असामान्य रक्तस्राव: खांसी में खून आना, मल-मूत्र के साथ खून आना, या महिलाओं में मासिक धर्म के अलावा रक्तस्राव होना।
• वजन घटना: बिना किसी कारण के शरीर का वजन तेजी से कम होना।
• पाचन में समस्या: लंबे समय तक पेट खराब रहना, निगलने में कठिनाई या भूख न लगना।
• थकान: पर्याप्त आराम करने के बाद भी बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
• आवाज में बदलाव: लंबे समय तक खांसी रहना या आवाज का भारी होना।
४. उपचार और चिकित्सा (Treatment)
चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण अब कैंसर का प्रभावी इलाज संभव है। बीमारी के चरण (Stage) और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर निम्नलिखित उपचार अपनाते हैं:
◽सर्जरी (Surgery): ऑपरेशन के जरिए कैंसर ग्रस्त हिस्से या ट्यूमर को शरीर से निकाल देना।
◽कीमोथेरेपी (Chemotherapy): इसमें दवाओं का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
◽रेडियोथेरेपी (Radiotherapy): इसमें उच्च ऊर्जा वाली किरणों (Radiation) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है।
◽इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह शरीर की अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर से लड़ने के लिए मजबूत बनाती है।
५. कैंसर से बचाव कैसे करें? (Prevention)
कहा जाता है कि "इलाज से बेहतर बचाव है" (Prevention is better than cure)। अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके हम कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
🔴 तंबाकू और नशीले पदार्थों से दूरी: तंबाकू का सेवन (बीड़ी, सिगरेट, गुटखा) कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। इससे पूरी तरह दूर रहें। शराब का सेवन भी सीमित करें।
🟢 संतुलित आहार: अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां और रेशेदार (Fiber) चीजें शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड (डिब्बा बंद भोजन), ज्यादा तेल-मसाले और रेड मीट (Red Meat) का सेवन कम करें।
🔴 शारीरिक सक्रियता: मोटापा कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक है। इसलिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम, योग या टहलने की आदत डालें।
🟢 नियमित जांच (Screening): 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच (Full Body Checkup) कराएं। महिलाओं को मैमोग्राफी (स्तन जांच) और पैप स्मीयर टेस्ट (सर्वाइकल कैंसर के लिए) समय-समय पर कराना चाहिए।
🟢 टीकाकरण (Vaccination): हेपेटाइटिस बी और एचपीवी (HPV) जैसे वायरस कैंसर का कारण बन सकते हैं। डॉक्टर की सलाह से इनके टीके लगवाएं।
🔴 धूप और प्रदूषण से बचाव: तेज धूप (UV किरणों) और हानिकारक रसायनों के संपर्क से बचें।
कैंसर का मतलब जीवन का अंत नहीं है। सही जानकारी, समय पर जांच और मजबूत इच्छाशक्ति से इस बीमारी को हराया जा सकता है। आज के दिन हम संकल्प लें कि हम अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे और अपने परिवार व समाज को इस बीमारी के प्रति जागरूक करेंगे। याद रखें - शुरुआती पहचान ही जीवन रक्षा करने में मदद करता हैं।