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বিজ্ঞাপন

पित्त दोष: एक संपूर्ण परिचय, लक्षण, प्रभाव और उपचार




पित्त दोष: एक संपूर्ण परिचय, लक्षण, प्रभाव और उपचार

(अपूर्व दास)

आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार, मानव शरीर तीन मूल तत्वों या 'दोषों' द्वारा संचालित होता है— वात, पित्त और कफ। इन तीनों दोषों में संतुलन रहने पर शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन इनमें असंतुलन होने पर शरीर में विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। आज की इस चर्चा में हम पित्त दोष क्या है, इसके कारण होने वाले रोग और इसे ठीक करने के आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथिक उपायों के बारे में विस्तार से नीचे उल्लेख करेंगे।


पित्त दोष क्या है? (What is Pitta Dosha?)

पित्त दोष मुख्य रूप से 'अग्नि' (Fire) और 'जल' (Water) तत्वों से बना है। हमारे शरीर की चयापचय क्रिया (Metabolism), पाचन शक्ति, शरीर के तापमान का नियंत्रण, बुद्धि और त्वचा की चमक के लिए पित्त दोष जिम्मेदार है। सरल भाषा में कहें तो, पित्त शरीर का ऊर्जा उत्पादन करने वाला इंजन है।
जब पित्त दोष संतुलित अवस्था में होता है, तो मनुष्य की पाचन शक्ति अच्छी होती है, दृष्टि तेज होती है और मन प्रसन्न रहता है। लेकिन अनियंत्रित खान-पान और जीवनशैली के कारण जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो यह शरीर में 'विष' की तरह कार्य करना शुरू कर देता है।





पित्त दोष बढ़ने के कारण:

पित्त दोष क्यों बढ़ता है, यह जानना अत्यंत आवश्यक है। इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
⚪ खान-पान: अत्यधिक तीखा, मसालेदार भोजन, मांस, खट्टा और नमकीन भोजन करना। चाय, कॉफी और शराब का अत्यधिक सेवन।
⚪ मौसम का प्रभाव: गर्मियों में या अत्यधिक गर्म वातावरण में अधिक समय तक रहने से पित्त बढ़ता है।
⚪ मानसिक कारण: अत्यधिक क्रोध, मानसिक तनाव, चिंता और परिश्रम।
⚪ अनिद्रा: रात में नींद पूरी न करना या समय पर भोजन न करना।
पित्त दोष के कारण कौन-कौन से रोग हो सकते हैं?
पित्त दोष का असंतुलन शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याओं और रोगों को जन्म दे सकता है। पित्त प्रकुपित होने पर दिखाई देने वाले प्रमुख रोग हैं:

(1) पाचन तंत्र की समस्याएं (Digestive Issues):

⚪ अम्लपित्त (Acidity/Hyperacidity): सीने में जलन, खट्टी डकारें आना।

⚪ गैस्ट्रिक अल्सर: पेट में छाले होना या अत्यधिक दर्द होना।

⚪ डायरिया: पित्त बढ़ने पर मल ढीला होता है और बार-बार शौच जाना पड़ता है।

(2) त्वचा की समस्याएं (Skin Disorders):

⚪ एक्जिमा और चर्मरोग: त्वचा का लाल होना, खुजली होना और फोड़े निकलना।

⚪ मुंहासे (Acne): विशेष रूप से चेहरे पर लाल रंग के मुंहासे निकलना।

⚪ घमौरियां: गर्मी के दिनों में शरीर में अत्यधिक जलन और घमौरियां निकलना।

(2) मानसिक और भावनात्मक समस्याएं:

⚪ अत्यधिक क्रोध: पित्त दोष वाले व्यक्तियों को बहुत जल्दी गुस्सा आता है और वे असहिष्णु हो जाते हैं।

⚪ मानसिक अस्थिरता: नींद की समस्या होना और मन को शांति न मिलना।

(4) अन्य शारीरिक समस्याएं:

⚪ शरीर का तापमान बढ़ना: बार-बार शरीर का गर्म रहना।

⚪ आंखों की समस्याएं: आंखों में जलन होना या आंखें लाल होना।

⚪ बालों की समस्याएं: कम उम्र में बाल सफेद होना या बाल झड़ना (Hair fall)।

⚪ रक्तस्राव: नाक से खून बहना (Nosebleed) या बवासीर (Piles) में रक्तस्राव होना।


पित्त दोष को कैसे ठीक करें? (जीवनशैली और भोजन)

पित्त दोष को नियंत्रित करने के लिए दवा से अधिक भोजन और जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।

आहार के नियम (Dietary Guidelines):

⚪ क्या खाएं (Cooling Foods):
◽ नारियल पानी अधिक पिएं।
◽ दही (जो खट्टा न हो) पित्त के लिए अमृत समान है।
◽ फलों में पका आम, तरबूज, सेब, खजूर और नारियल लाभकारी हैं।
◽ सब्जियों में खीरा, लौकी, परवल, पत्तागोभी और फूलगोभी 
खानी चाहिए।

⚪ क्या न खाएं (Foods to Avoid):
◽ अत्यधिक तीखा, खट्टा (जैसे- नींबू, इमली) और नमकीन भोजन से बचें।
◽ गरम मसाले, लहसुन और कच्चा प्याज कम खाएं।
◽ कॉफी, शराब और सिगरेट पूरी तरह से छोड़ देना चाहिए।
◽ सिरका और अचार खाना बंद कर दें।


जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Changes):

⚪ दोपहर का भोजन समय पर करें। पित्त का प्रकोप दोपहर में अधिक होता है, इसलिए भूखे रहना हानिकारक है।
⚪ रात 11 बजे से पहले सोने की आदत डालें। मोबाइल फोन का उपयोग कम करें, यह शरीर को गर्म करता है।
⚪ चंद्रमा की रोशनी में या शीतल हवा में कुछ समय बिताने से पित्त शांत होता है।
⚪ क्रोध को नियंत्रित करने के लिए ध्यान (Meditation) और योगासन काफी मदद करते हैं। 'शीतली प्राणायाम' पित्त कम करने के लिए बहुत प्रभावी है।
⚪ हस्तमैथुन और यौन संबंध कम करें। यह शरीर को कमजोर और गर्म करता है।

पित्त दोष को पूरी तरह ठीक करने वाली आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेद में पित्त दोष निवारण के लिए कई जड़ी-बूटियों और शास्त्रीय औषधियों का उल्लेख है। ये औषधियां पित्त को शरीर से बाहर निकालकर संतुलन वापस लाती हैं।

(1) आंवला (Amla/Amalaki):

⚪ आंवला पित्त नाशक सर्वश्रेष्ठ फल है। यह शरीर की आग या गर्मी को कम करता है। रोजाना आंवले का रस या चूर्ण (Churna) खाने से एसिडिटी और सीने की जलन कम होती है।

(2) घृतकुमारी (Aloe Vera):

⚪ यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है और शरीर को शीतल करता है। खाली पेट एलोवेरा का जूस पीने से पित्तजनित कब्ज और त्वचा के रोग ठीक होते हैं।

(3) त्रिफला (Triphala):

⚪ आंवला, हरड़ और बहेड़ा का मिश्रण त्रिफला है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

(4) शतावरी (Shatavari):

⚪ यह शरीर को पोषण देती है और शीतल करती है। विशेषकर महिलाओं की हार्मोनल समस्याओं और अल्सर को ठीक करने में यह बहुत लाभकारी है।

(5) आयुर्वेदिक मिश्रण औषधियां: (इन्हें चिकित्सक की सलाह लेकर ही खाएं)

◽ अविपत्तिकर चूर्ण (Avipattikar Churna): कब्ज और एसिडिटी के लिए श्रेष्ठ।

◽ कामदुधा रस (Kamadudha Ras): पित्तजनित सिरदर्द, जलन और मानसिक अस्थिरता के लिए।

◽ प्रवाल पिष्टी (Praval Pishti): कैल्शियम का स्रोत है और पित्त की गर्मी कम करने के लिए उपयोग होती है।

पित्त दोष या इसके लक्षणों के लिए होम्योपैथिक औषधियां
होम्योपैथी में रोग के लक्षण और व्यक्ति के स्वभाव के आधार पर दवा दी जाती है। पित्त दोष के लक्षणों के लिए निम्नलिखित दवाएं अक्सर इस्तेमाल की जाती हैं:

(1) नक्स वोमिका (Nux Vomica):

⚪ जो लोग अत्यधिक मसालेदार भोजन खाते हैं, नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं और जिन्हें गुस्सा अधिक आता है, उनके गैस्ट्रिक और कब्ज के लिए यह सर्वोत्तम दवा है।

(2) आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album):

⚪ यदि पेट में तीव्र जलन हो, प्यास अधिक लगे लेकिन पानी कम पिया जाए, और फूड पॉइजनिंग (Food poisoning) हो, तो इस दवा का उपयोग किया जाता है।

(3) पल्सेटिला (Pulsatilla):

⚪ जो लोग घी या तेलयुक्त भोजन सहन नहीं कर पाते और पित्त की समस्या से ग्रस्त होते हैं, उनके लिए यह दवा प्रभावी है।

(4) नेट्रम फॉस (Natrum Phos):

⚪ इसे एसिडिटी के लिए 'बायोकेमिक' दवा के रूप में उपयोग किया जाता है। खट्टी डकार, सीने में जलन और पाचन की समस्याओं में यह जादुई काम करती है।

(5) रॉबिनिया (Robinia):

⚪ यदि अत्यधिक एसिडिटी के कारण सिरदर्द हो और उल्टी जैसा महसूस हो, तो रॉबिनिया का उपयोग किया जा सकता है।

(6) सल्फर (Sulphur):

⚪ शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होने पर, हाथ-पैर के तलवों में जलन होने पर और त्वचा रोग होने पर सल्फर का उपयोग किया जाता है।

हालांकि ऊपर बताई गई दवाएं आमतौर पर सुरक्षित हैं, फिर भी बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें नहीं लेना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और जटिल रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।
पित्त दोष केवल दवा से ठीक नहीं हो सकता। इसके लिए आपको अपने मन को शांत रखना होगा और 'शीतल' जीवनशैली अपनानी होगी।

पित्त दोष हमारे शरीर की ऊर्जा का स्रोत है। इसे नष्ट करना नहीं, बल्कि इसे संतुलित रखना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। सही आहार, पर्याप्त आराम और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का उपयोग आपको पित्तजनित सभी समस्याओं से मुक्त कर स्वस्थ जीवन जीने में मदद करेगा।